साहित्य

गीता का उपदेश (दोहा)

किरण कुमारी 'वर्तनी'

किरण कुमारी ‘वर्तनी’ जमशेदपुर

गीता के उपदेश में, है जीवन का मूल।
पाठ सुने ज्यों ध्यान से ,खार लगेंगे फूल।।

तेरा मेरा चक्र में,
नहीं फँसोगे मित्र।
स्मरण रहेगा कर्म बस, बदले भाव चरित्र।।

बढ़ जाती है पाप से, धरणी का ज्यों भार।
श्री हरि नव अवतार धर, करते हैं उद्धार ।।

युद्ध घड़ी में पार्थ ज्यों ,भटक गए थे राह।
कान्हा गीता ज्ञान से, खोले भेद अथाह।।

कर्म करो बस पार्थ तुम ,फल की चिंता छोड़।
जन्म -मरण के चक्र से, नाता मत तू जोड़।।

कर्ता है तू कर्म कर, मुख यूँ मत तू मोड।
फंँसा हुआ क्यों मोह में ,शीघ्र चक्र यह तोड़।।

जग का पालनहार मैं, आदि मध्य अरु अंत।
समझ गए जो बात यह ,बन जाते हैं संत।।

घटित हुआ जो भी यहांँ, मैं कारण परिणाम ।
है प्रभाव मेरा यहांँ, मैं ही चारों धाम।।

जो भजते हैं ईश को, करते नहीं कुकर्म।
रहते चिंता से परे, समझे जीवन मर्म।।

तेरा मेरा कुछ नहीं, है यह माया जाल ।
क्षण भंगुर सुख दुःख है ,रहा बदलता काल।।

हर सुख-दुख में साथ हूंँ, समझे मेरे भक्त।
करते हैं बस कर्म वह, हो मुझमें अनुरक्त।।

समय नहीं रुकता कभी ,चलता चल तू संग ।
कर्म तुम्हारे हाथ बस, भरो स्वप्न में रंग।।

किरण कुमारी ‘वर्तनी’ जमशेदपुर

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