साहित्य

स्वयं से तो बात करके देख

अरुण दिव्यांश

स्वयं आत्मसात करके देख ,
मन को तो मात करके देख ,
स्वयं पाएगा दिल में प्रभात ,
स्वयं से तो बात करके देख ।
सदा पाएगा उषा का बेला ,
मिट जाएगा तम का खेला ,
स्वयं से तो बात करके देख ,
छॅंट जाएगा माया का मेला ‌।
पहचान कर रिश्ते नात देख ,
पहचान कर तू प्रभात देख ,
मत घबड़ा अब रात देख ,
संग तेरे अब हैं मात देख ।
जग में बहुत ही मैला देखा ,
मानव नाग ये विषैला देखा ,
व्यवहार कटु करैला देखा ,
वाणी नहीं ये दुधैला देखा ।
दुश्मनों के अब घात देख ,
दुश्मनों के मत जात देख ,
कौन तेरा है अपना पराया ,
चुन चुनकर अब भ्रात देख ।

अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।

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