साहित्य

दर्द का दरिया बहा कर

कनक

दर्द का दरिया बहा कर

दर्द का दरिया बहा कर ख़ुद तर जाऊंगा
ख़्वाब में खो कर वादे पे यूं घर जाऊंगा।।//१//

तेरी तस्वीर को सीने से लगा के रक्खा
तेरी आंखों में खुद ठहर जाऊंगा।।//२//

दरकिनार मगर करते हैं वो हमको भी अब
वह बुलाएगा कभी दिल में उतर जाऊंगा।।//३//

उसकी तस्वीर को देखूं मैं भी हरदम जाने
गर मुहब्बत में पुकारे तो मैं पर जाऊंगा।।//४//

देखा उसको हमने जब से जुदा है दिल भी
वरना खुद्दार मुसाफ़िर हूं गुजर जाऊंगा।।//५//

ग़ज़ल

उसी का झूठा वो वादा नहीं निभा मुझसे
कहे तो क्या हम तुमको नहीं बड़ा मुझसे।।//१//

सितम मिला इतना हैं अभी अभी हम को
वो एक प्यारा भी होता नहीं मिला मुझसे।।//२//

बड़ी ही मुश्किल है अब विदा हो जाते हम
वो एक बच्चा जो होता भी बड़ा मुझसे।।//३//

बड़ी शिद्दत से पाया कभी मगर सोचा
वो आप का कुछ होता कभी भला मुझसे।।//४//

सुना नहीं हमने भी कभी किसी को भी
उसी के इश्क़ का मेहर कभी गिरा मुझसे।।//५//

कनक

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