आलेख

अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस ..…

मधु माहेश्वरी

पहाड़,शैल,गिरी,नग,भूधर, तुंग या फिर मेरु ..किसी भी नाम से पुकारें इन्हें.. पर्वत हमारी सांस्कृतिक और भौगोलिक विशेषताओं के वाहक है ।पहाड़ों पर विश्व की समूची आबादी का 13% यानी 915 मिलियन लोग रहते हैं।ताज़ा आंकड़ों के अनुसार पृथ्वी की सतह का 27% हिस्सा पहाड़ है लेकिन वैश्विक तापमान में होने वाली निरंतर वृद्धि के कारण स्नोलाइन ज़्यादा ऊंचाई की ओर जा रही है।जहाॅं पहले बर्फ होती थी वहाॅं वनस्पति दिखने लगी है।बर्फ़बारी वाले इलाकों में प्रलयकारी बारिश होने लगी है।बादलों के फटने की घटनाएं हिमालय के उच्च बर्फी़ले इलाकों में भी हो रही है।वैश्विक पर्यावरणीय प्रदूषण बढ़ने के कारण पर्वतीय समुदाय का जीवन प्राकृतिक आपदाओं से घिर रहा है।वनों और पर्वतों की कटाई ने भूस्खलन की समस्या को बढ़ाया है जिससे नदियों का जलस्तर कृत्रिम तौर से ऊपर उठ जाता है और नतीजा होता है कृत्रिम बाढ़ ।
1992 में संयुक्त राष्ट्र ने पहाड़ों की स्थिति पर चिंता करते हुए एक प्रस्ताव पेश किया था।इसी को आगे बढ़ाते हुए 11दिसंबर 2002 का दिन यू.एन. इंटरनेशनल इयर आफ माउंटेंस के रूप में मनाया गया।बाद में 2003 से11दिसंबर का दिन इंटरनेशनल माउंटेन डे या अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस के रूप में मनाया जाने लगा ।इस दिन पर्यटन विकास गतिविधियों का प्रदर्शन, माउंटेन बाइकिंग,वर्ल्ड वाचिंग आदि द्वारा पर्वतों की खूबसूरती और अहमियत के प्रति लोगों को आकृष्ट किया जाता है।इस दिवस का उद्देश्य पर्वतीय जीवन में सुधार लाना और पर्यावरण संरक्षण करना है।साथ ही पर्वतों के सतत विकास हेतु आम आदमी को जागरुक भी करना है ।
अब ज़रा सी इस बात पर भी चर्चा करते हैं कि आखिर पहाड़ क्या है?
दरअसल पहाड़ या पर्वत वह क्षेत्र है जो अपने आसपास के धरातल से कम से कम 600 मीटर ऊंचा होता है।पर्वत अकेले भी हो सकते हैं और शृंखलाबद्ध भी।पर्वत के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण पर्वत 15,000 मीटर से अधिक ऊंचाई नहीं पा सकते ।पृथ्वी का सबसे ऊंचा पर्वत माउंट एवरेस्ट 8,848 मीटर ऊॅंचा है जो नेपाल में स्थित है और सौरमंडल का सबसे ऊॅंचा पर्वत ओलपस मान्सु मंगल  ग्रह पर स्थित है जिसकी ऊंचाई 21,171 मीटर है।हर पर्वत की एक चोटी होती है।विश्व की 14 सबसे ऊॅंची चोटियां हिमालय पर स्थित है और हमें गर्व है कि हिमालय का एक हिस्सा भारत में भी स्थित है।
अरावली विश्व का सबसे प्राचीन पर्वत है और हिमालय विश्व का सबसे युवा पर्वत और सुखद सहयोग यह है कि येदोनों ही पर्वत भारत में स्थित हैं।
उत्पत्ति के आधार पर पर्वत चार प्रकार के होते हैं …वलित,ब्लॉक,ज्वालामुखी और अपशिष्ट।कुछ विश्व प्रसिद्ध पर्वत हैं…. हिमालय,एल्प्स,रॉकी,एण्डीज,फ्युजीयामा ,विंध्याचल, अरावली,नीलगिरी,साल्ट रेंज,ब्लैक पहाड़ियां,हेनरी पर्वत आदि आदि ।

अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस मनाने का तात्पर्य है कि हम प्रकृति की इस खूबसूरत संरचना के प्रति अपने दायित्व बोथ को समझते हैं।पहाड़ जल के सबसे बड़े भंडार हैं।70% जनसंख्या इन्हीं पहाड़ों से निकली नदियों से जल प्राप्त करती है।भूमिगत जल भंडारण में पहाड़ों की अहम् भूमिका है।दरअसल पहाड़ शक्तिपुंज  हैं फिर चाहे वह शक्ति आध्यात्मिक हो,भौतिक हो,औषधीय हो,पर्यावरणीय हो..यानी हर तरह की सकारात्मक ऊर्जा के अजस्र भंडार हैं हमारे ये पर्वत।यहाॅं की शुद्ध आबोहवा अनेक बीमारियों से निजात दिला सकती है।अनेकों वनस्पतियों और दुर्लभ जड़ी बूटियों का अलबेला खजाना है इन पहाड़ों पर,जिसे तलाशा जा रहा है।
याद कीजिए रामायण की वह घटना जब मूर्छित लक्ष्मण जी के प्राण बचाने हेतु संजीवनी बूटी की तलाश में हनुमान जी पूरा पहाड़ ही उठाकर ले गए थे। वैद्य गुरु ने संजीवनी निकालकर लक्ष्मण जी को जीवन दान दे दिया।बचा हुआ पहाड़ टुकड़े-टुकड़े करके हनुमान जी ने वहीं लंका में फेंक दिया।श्रीलंका में आज भी वह पहाड़ रूमशाला पर्वत के नाम से मशहूर है और उस पहाड़ की मिट्टी और जलवायु बिल्कुल अलग किस्म की है।
पहाड़ जीवन देते हैं,अर्थव्यवस्था को गति भी देते हैं।पहाड़ों से निकलने वाली नदियां हमारी धरा को शस्य-श्यामला बनाती हैं।यानी पर्वत बिना श्री और समृद्धि की कल्पना बेमानी है।पहाड़ वनों और वन्य जीवन के प्रहरी है ।भारत जैसे अध्यात्म प्रधान देश में तो पहाड़ की गुफाओं/कंदराओं में पूरी तहजीब बसती है।
पृथ्वी की भौगोलिक स्थिति बदलने के साथ ही पर्वतों की संरचना में भी बदलाव दिखने लगता है। सादगी और सरलता के लिए मशहूर पर्वतीय समुदायों का संरक्षण अब एक चुनौती बनता जा रहा है।
पहाड़ हमारी जीवन रेखा है।आइए इनके संरक्षण हेतु समग्र प्रयास करें।
@मधु माहेश्वरी गुवाहाटी असम

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