साहित्य

लेखनी उगल मत

दुर्गेश मोहन

जन्मदिवस 25 दिसम्बर पर विशेष

लेखनी उगल मत विरद गान,
वाजपेयी अजय हो विजय गान।
जिनका पखारता चरण उदधि,
हिमवान मुकुट जिनका सुन्दर।
उस भारत मां के आप थे सपूत,
गंगा हीरे का हार सुघर।
धरती के कण कण में गूंज रहा,
वाजपेयी आपका सुयश गान।
लेखनी उगल मत विरद गान,
वाजपेयी अजय हो विजय गान।
वाजपेयी थे सफल नेता,
ये थे भारत के कर्णधार।
वाजपेयी प्रधानमंत्री व कवि बनकर,
भारत का किए सूत्रधार।
ये भारत का किए नवनिर्माण।
जिससे प्रभावित हो
जनता इन पर देती थी जान।
पोखरण परमाणु सिद्धांत में
आपका था अहम योगदान।
इसे भारतीय सदैव स्मरण रखेंगे,
क्योंकि यह है भारत की शान।
लेखनी उगल मत विरद गान,
वाजपेयी अजय हो विजय गान।

दुर्गेश मोहन
बिहटा, पटना , बिहार (भारत)

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