साहित्य

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई

डॉ मीना कुमारी परिहार 'मान्या'

आओ सुनाएंँ अटल बिहारी जी की कहानी
सुनी है जो औरों से इनकी जुबानी
प्रणम्य हैं नमणीय हैं सबके अटल
ग्वालियर में जन्मे दुनियाँ में अनूठे
जिसे पाकर धन्य हुआ मांँ का आँचल
मांँ कृष्णा बाजपेई हुई निहाल
आंँखों के तारे थे भारत के लाल
वाणी में मधुरता सादगी के प्रतीक
हिंदी का है मान बढ़ाया प्रधानमंत्री
पद संभाला
अटल आपकी जय हो आपने इतिहास रचाया
माँ भारती के तुम हो लाल
भारत देश के तुम हो भाल
अद्भुत प्रखर वक्ता थे,राजनीति के पुरोधा थे
जन-जन के हृदय में बसे हो तुम
आज कहाँ हो गए हो हमसे गुम
भारत की पहचान हो तुम
विद्या की देवी सरस्वती के वरद पुत्र हो तुम
लोकतंत्र के सबसे श्रेष्ठ महान राजनीतिज्ञ
जिसके अटल इरादों से सारी दुनियांँ हारी
संघर्षों में बीता उनका बचपन
पोखरण में बजा उनका डंका
जनसंघ से लेकर भाजपा का उत्थान
किया
अपनी भाषा शैली से वह मंत्र मुग्ध कर देते थे

डॉ मीना कुमारी परिहार ‘मान्या’

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