आलेख

श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी

गोवर्धनसिंह फ़ौदार 'सच्चिदानन्द'

अटल बिहारी वाजपेयी जी मोरिश्यस देश केलिए अपनों में से एक चहेते थे।वे कवि या फिर नेता के रूप में, अद्भुत लेखनी व कण्ठ के धनी, या राष्ट्रहित को सर आँखों पर रखने वाले के रूप में, मोरिश्यन देशवासियों के हृदय में वास करते थे। उनके जनहित की भावना सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं थी, अपितु मोरिश्यस याने छोटा भारत तक भी फैली हुई थी। ऐसे श्रेष्ठ नेता कुशल व्यक्तित्व वाले प्रखर वक्ता के साथ हमारा गहरा रिश्ता होना गौरव की बात थी। यहाँ उनके दृढ़ संकल्प या फिर सफल कुशल राज्यनेता की चर्चा प्रशंसा सदैव होती थी, आज भी होती है।

उनकी रचना “हिन्दू तन मन हिन्दू जीवन रग रग हिन्दू मेरा परिचय” से लेकर उनकी सारी रचनाएँ मोरिश्यस में आज भी पढ़ी पढ़ाई जाती है।

अगर मैं गलत नहीं हूँ तो वे भारतीय सांसद के रूप में दो बार मोरिश्यस के दौरे पर आये थे। हमारा सोभाग्य था हमारे देश की स्वतंत्रता उत्सव में हमारे साथ थे। क्या स्वयं सेवक, क्या सिद्धहस्त कवि, राजनितिज्ञ क्या भारत देश के प्रधानमंत्री, हर हाल में ये हमारे प्रिय थे।

यह बात भी उल्लेखनीय है, जब इनका देहान्त हुआ था, तो कम ही ऐसे देश होंगे जहाँ के झण्डे झुकाये गये होंगे।मोरिश्यस के सरकारी भवनों के साथ निजी विभागों में भी राष्ट्रीय ध्वज को झुकाया गया था।

मोरिश्यस में अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविताओं को सुनने का सौभाग्य मोरिश्यनों को प्राप्त हुआ था। भारत की भाँति मोरिश्यस के प्रति भी उनका सपना था कि यह देश भय और भूख से मुक्त हो।तथा चमकता भारत की तरह हो।

आज भी स्मरण होता है उनका संदेश, लोगों में हौसला भरना, हिन्दू संस्कृति को बढ़ावा देना, राष्ट्रधर्म, जाति या फिर देश केलिए मर मिटना आदि।

भारत रत्न, पद्मविभूषण तथा विभिन्न सम्मानों से सम्मानित श्रेष्ठ पुरुष या फिर वीर अर्जुन – भीष्मपितामह कहलाने वाले ऐसे महान व्यक्तित्व की कमी आज भी भारत के साथ हम भी महसूस करते हैं सदैव करते रहेंगे ।

(गोवर्धनसिंह फ़ौदार ‘सच्चिदानन्द’)

पता :मोरिश्यस।

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