
लंबी दास्तान बन गई थी जो अब खत्म होने वाली हैं,
लिखुंगा नये पन्नों पर नई हसरतें, मेरी कल्पनाओं संग,
नया वर्ष हर बार आता हैं, दिसंबर बाद जनवरी आती हैं,
31 दिसंबर बाद 1 जनवरी नया साल दोनों से जुड़ा सा हैं,
अंतर एक साल पुराना लगता है, फिर नया सा लगता हैं,
31 दिसंबर व 1 जनवरी नयादौर जी रहे हम सब खुशी से,
कोई प्रतिबंध लगाएं मगर ये खुशियां हम छोड़ नहीं सकते,
ये जलसे, दावतें, हम हर बार जी रहे हैं, हर साल-दर साल,
नया उल्लास, नयी तरंग, नई उमंग हर बार ये होता है संग,
हरसाल डायरी भरी होती, उसे छोड़कर होती नयी शुरुआत ,
इस बार भी यही सब कुछ, सामने आया है बनकर नयी बात,
लिखुंगा नये पन्नों पर नई हसरतें, मेरी कल्पनाओं संग,
नया वर्ष हर बार आता हैं, दिसंबर बाद जनवरी आती हैं,
लिखुंगा नये पन्नों पर नई हसरतें, मेरी कल्पनाओं संग ।
– मदन वर्मा ” माणिक ”
इंदौर मध्यप्रदेश




