साहित्य

आस का दीप

डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित

दीप की तरह जलता रहूँगा।
राहें रोशन मैं करता रहूँगा।।

बात सच है जो कहता रहूँगा।
मैं उसूलों पर चलता रहूँगा।।

इस जमीं पर जहाँ तक रहूँगा।
वतन की सेवा करता रहूँगा।।

अनपढ़ों को तालीम देता रहूँगा।
उनके घर उजाला करता रहूँगा।।

इल्म है जितना बाँटता रहूँगा।
गैरों से पल पल सीखता रहूँगा।।

प्यास अधरों की मिटाता रहूँगा।
प्यासे को पानी पिलाता रहूँगा।।

मरुधर में हरियाली करता रहूँगा।
आस का दीप हूँ जलता रहूँगा।।

-डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित
कवि,साहित्यकार
भवानीमंडी

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