साहित्य

रास्ते

सुमन बिष्ट

असफलता के दो होते हैं रास्ते,
दोनों ही दिखते हैं आसान।
पहला,बिना सोचे काम करना,
दूजा,रहना अकारण परेशान।

बिना सोचे जो दौड़ पड़े,
ठोकर खाए बार-बार।
गलती से कुछ सीख न पाए,
बिगड़ जाए हर काज।

जो बस सोचते ही रहते,
और डरते रहते दिन और रात।
कल करेंगे, कल करेंगे,
करने से यूँ ही बीते दिन रात।

हाथ में मौका आता है,
फिर चुपके से है जाता।
जो न आगे कदम बढ़ाए,
वो हमेशा पीछे रह जाता।

थोड़ा सोचना भी ज़रूरी है,
और काम करना भी है साथ।
सोच और काम,मिल देते हैं,
सपनों को इक नई परवाज़।

पहले समझो क्या करना है,
फिर हिम्मत दिखलाओ।
छोटा सा पहला कदम बढ़ाओ,
और अपना रास्ता खुद पाओ।

न ज्यादा जल्दी अच्छी है,
न ज्यादा देर लगाओ।
सोचो भी और काम भी करो,
जीवन अपना सफल बनाओ।

सुमन बिष्ट, नोएडा

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