आलेख

कविता मज़ाक नहीं साहब, बहुत तड़फाती है , पूरी रात जगाती हैं

डॉ रामशंकर चंचल

कविता कहां मिलती है साहब पढ़ने हजारों में, पांच दस होते है जो कविता को जन्म देते है बाकी सब कुछ तो भी लिख रहे या कहे सता को और को खुश करने या पर्व तिथी
पर नाम की भूख में धन की भूख में कविता लिखते हैं जबकि कविता कभी,लिखी नहीं जाती हैं वह तो स्वतं जन्म लेती है और कब किस समय उसका जन्म होता है कोई नहीं जानता रात दो बजे हो या चार उठ कर कवि की उठा देती है और कितनी पीड़ा और संवेदना के साथ जन्म होता हैं वह कविता होती हैं जो
सभी के दिल और दिमाग में दस्तक दे सदियों जिंदा रहती हैं

कविता वह है जनाब , कविता मज़ाक नहीं जो बना रखा है कविता
तालियां नहीं बटोरती है कविता सुन
व्यक्ति खामोश हो जाता है और सोच और चिंतन को जन्म देती है
खैर लिख दिया लिखना था, पीड़ा होता हैं जब हर व्यक्ति के लेखन को
उसकी कविता नाम दे दी जाता है
कविता, लिखना चाहते है तो अपने भीतर संवेदनशील व्यक्ति को मानवीय सोच और चिंतन को जन्म दे और की पीड़ा को खुद की पीड़ा समझे बहुत बहुत कुछ चाहिए एक अच्छे कवि होने में यूं ही नहीं कवि होता है सच तो यह है कि कवि होना ईश्वर की कृपा है उपहार है और आशीष है

डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश

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