साहित्य

नव-वर्ष

दया भट्ट दया

हर सुबह नया कोई अरमान मांगूंगी,
नव साल में ज़िंदगी से वरदान मांगूंगी।
बीते हुए लम्हों की राख समेटकर,
कल के लिए फिर नई पहचान मांगूंगी।
टूटे हुए ख़्वाबों को सीने से जोड़कर,
आँखों के लिए एक नई उड़ान मांगूंगी।
रिश्तों की सूनी शाखों पर प्रेम खिले,
दिल के लिए ऐसी मुस्कान मांगूंगी।
जो रूठ गए हैं उन्हें फिर से पा लूँ,
ख़ुदा से यही एक निशान मांगूंगी।
हर घर में उजाले, हर मन में विश्वास,
धरती के लिए ऐसा वरदान मांगूंगी।
*दया*, नए वर्ष की हर एक सहर में,
जीवन से सुख, शांति, सम्मान मांगूंगी।

*@दया भट्ट दया*
*खटीमा उधम सिंह नगर (उत्तराखंड)*

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