
यूं जला के दिल मेरा भी मनाता क्या है
गर मुहब्बत मुझसे फ़िर जलाता क्या है।।//१//
जल रहा हूं मैं भी तेरी ही हकीकत से अब
गर क़यामत तुझमें फिर भी डराता क्या है।।//२//
रास्ता गर है तो दिल से ही जुदा कर मुझको
हैं हक़ीक़त तुझमें तो भी दिखाता क्या है।।//३//
दर्द दरिया बन जाता है तो हाले दिल पे
ख़्वाब मेरे कुछ बिगड़े है सुनाता क्या है।।//४//
देखना है गर तुझको घाव में मत कर तू ग़म
बन क़यामत मुझ पे फिर तो बताता क्या है।।//५//
कनक




