
हैं इबादत में मशग़ूल सब,
दो जहां को बनाया है रब।
चांद , तारे , नदी , आसमां,
पेड़ – पौधे है सज़्दे में सब।
ज़िंदगी बंदगी के लिए,
हर ख़ुशी आपने दी है रब।
उम्र भर मैं भी सज़दा करूँ,
बिगड़ी क़िस्मत बनाई है रब।
~ आकिब जावेद

हैं इबादत में मशग़ूल सब,
दो जहां को बनाया है रब।
चांद , तारे , नदी , आसमां,
पेड़ – पौधे है सज़्दे में सब।
ज़िंदगी बंदगी के लिए,
हर ख़ुशी आपने दी है रब।
उम्र भर मैं भी सज़दा करूँ,
बिगड़ी क़िस्मत बनाई है रब।
~ आकिब जावेद