साहित्य

नवल अपेक्षा मन धरे

आशा बिसारिया

नवल अपेक्षा मन धरे ,आया है छब्बीस।
भारी मन से अलविदा,तुमको है पच्चीस।।
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नया साल मस्ती भरा,सभी मनाते हर्ष।
लोग झूमकर नाचते,स्वागत है नववर्ष।।
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भोर भये कुहरा पड़े ,सभी ओर है धुंध।
लगे ठण्ड ने कर लिया,सूरज से अनुबंध।।
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ठण्डे पेय विदा हुए,बढ़ा चाय का चाव।
चौराहों पर दीखते ,जलते हुए अलाव।।
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गलन और ठिठुरन बढ़ी,थर-थर काँपे गात।
हाथ-पैर ठण्डे रहें ,किट-किट करते दाँत।।
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आशा बिसारिया चन्दौसी

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