
नव प्रभात में हर रश्मियाँ,जीवन में भरे मधुर सौगात।
नई उमंगे नई तरंगें नवीन,सुख शांति का नवप्रभात।।
ईश कृपा से नव आंग्ल वर्ष,2026 की यह शुरुआत।
हर घर आँगन और जन मन,में हर्ष की करे बरसात।।
जीवन आनंद संग हमको,सुख दुःख अनुभव कराया।
हरेक गिले शिकवे किस्से,दिल से दूर भगा दें भाया।।
होगी बड़ी बेइमानी यदि,ईश्वर का आभार न जताया।
विधाता के मर्जी से ही,2025 सकुशल बिता पाया।।
दस्तक दिया पुनः नूतन वर्ष,मंगलमय हो नव विहान।
स्वागत वंदन अभिनंदन तेरा,नववर्ष 2026 विधान।।
प्रेम सौहार्द सद्भाव भाईचारा,विश्वबंधुत्व ही पहचान।
नए विश्वास नई ऊर्जा,नव संकल्पों साथ भरें उड़ान।।
स्वस्थ सुखी निरोग तन मन,मानव होठों हो मुस्कान।
दया धर्म शुचि कर्म परोपकार,सदा हृदय हो इंसान।।
मन कर्म वचन वाणी कभी,दुखद कष्ट न दे भगवान।
दीनहीन के कष्ट निवारक,बन कर पीड़ा हरे इंसान।।
जीवन के अंधकार छाँट,हे!प्रभु उजाले से भर देना।
सुखी निरोग दीर्घायु रखना,खुशहाली से भर देना।।
माँ सरस्वती-लक्ष्मीजी,कृपा से घर आँगन भर देना।
जीवन में हो विकास,सुख समृद्धि शांति भर देना।।
मानव तन में जन्में जीव,धर्म कर्म मानव के करना।
शुचि लक्ष्यपूर्ण जीवन हो,दानव के कर्म न करना।।
धर्म संस्कृति समाजसेवा,रक्षा कल्याण हिय रहना।
राष्ट्रप्रेम वसुधैव कुटुंबकम् देशप्रेम हर मन भरना।।
भाई-बहन भार्या बच्चे,सबको शुभ हो नव विहान।
मात-पितु कुल कुनबा,मित्र सम्बन्धी सब विद्वान।।
जीवन सुखी रहे सबका,होंए चिरंजीवी आयुष्मान।
उन्नति प्रगति सफलता का,ईश्वर दो नूतन वरदान।।
नूतन वर्ष आगमन के,नव प्रभात की नई रश्मियाँ।
सब के जीवन में लाए,यह साल सैकड़ों खुशियाँ।।
दुःख दारिद्र विहीन रहो,खिलें आनंद की कलियाँ।
नित नई सफलता दे,नव विहान की नई रश्मियाँ।।
याद रखें सारी मर्यादाएं,दिवस शुभ मंगलमय हो।
सुख समृद्धि हर्ष दे सबको,नववर्ष मंगलमय हो।।
दुःख कष्ट निवारक बने,सबके लिए मंगलमय हो।
नूतनवर्ष मंगलमय हो,ये नूतन वर्ष मंगलमय हो।।
आपको सपरिवार नववर्ष 2026 मंगलमय हो।
रचयिता :
*ज्ञान विभूषण डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*
सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी.कालेज,प्रतापगढ़,उ.प्र.
(शिक्षक कवि लेखक साहित्यकार समीक्षक समाजसेवी)




