
आया माता शाकुंभरी का जन्मदिन प्यारा,
धन्य हुई धरती, सजा जग सारा।
भूखों को अन्न देने वाली मइया,
करुणा की धारा, ममता की छैया।
शाक-फल से जिसने जीवन सींचा,
सूखे कंठों को अमृत दिया खींचा।
दुखियों की पीड़ा पल में हर लेती,
भक्तों की झोली खुशियों से भर देती।
जय हो मइया शाकुंभरी रानी,
तेरी महिमा वेदों ने बखानी।
भूख, भय, अभाव को दूर भगाया,
मानवता को जीने का ढंग सिखाया।
आज जन्मदिन पर दीप जलें,
तेरे चरणों में श्रद्धा के फूल खिले।
माता रहो सदा हम पर मेहरबान,
जय शाकुंभरी, जय कल्याण।
हमारी कुल देवी को हमारा बारम्बार प्रणाम
कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश




