साहित्य
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श्री तुलसी दास रचित हनुमान चालीसा ( सरलार्थ)
दोहा 1 श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि।। बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ शब्दार्थ चरन…
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संघर्ष ही जीवन है
राहों में कांटे होंगे, ये पहले से तय था, मंज़िल वही मिलेगी जहाँ हौसला सच्चा था। गिरकर जो संभल जाए,…
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न बिगड़े भारत माँ का चित्र
सुकर्मों का संबल हो मीत। सजाकर सत्कर्मों की रीत।। सभी को गले लगाओ नित्य। रचो सुंदर सुगठित साहित्य ।। मधुर…
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अंधेरी राते
अंधेरी रात होती भयानक है आना जाना मुश्किल होता है इससे पेड़ ध्वनि से झूमते है हवाएं भी जोर जोर…
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ईश भक्ति दोहे
ईश भक्ति की शक्ति है , आत्म शांति की बात। नाम सदा जपते रहें , दिन हो चाहे रात।। —…
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आसमान
आसमान में कितने सितारे हैं तोड़ लाऊंँ क्या!! इस ग़म-ज़दा ज़िन्दगी को वही, छोड़ आऊंँ क्या!! अब तक वादे वफ़ा…
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बागवान
खुशनशीब है वो चमन जिनका होता है बागवान बाल बांका ना कर पाता जो. बैरी हो सारा जहान गुलशन की…
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होता नवल विहान
होता नवल विहान, लाल रवि आए । चहके पंछी अब डाल, समय अब आए। खिलता नव अरुणिम भोर, लाल रवि…
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संगी साथी पुस्तकें
जीवन का वरदान हैं पुस्तकें, आजीवन राह दिखाएं पुस्तकें। जो हर घड़ी व्यवहार करें मित्रवत,वो होती हैं पुस्तकें। पुस्तक में…
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फागुन फिर आकर चला गया
प्रियतम के प्रेमिल प्राँगण में, निशि वासर मन को छला गया। बहुविधि वसंत के आँगन में, फागुन फिर आकर चला…
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