साहित्य
-
यात्रा ,,,,स्व की खोज
।जीवन में कुछ यात्राएं हम स्वयं को खुश रखने के लिए करते है वही हम एक ही जीवन शैली…
Read More » -
खामोशी
खामोश हैं जुल्मी हवाऍं , गगन में ये क्यूॅं खामोशी । पागल से हैं दिवा निशा , मौसम में क्यूॅं…
Read More » -
तौहफ़े अल्फ़ाज़ के
मेरे पास देने को कुछ भी नहीं, न सोने की चूड़ियाँ, न मोतियों का हार, मैंने बस शब्दों को सँवारा…
Read More » -
शिव शंकर ने पिया हलाहल
शिव शंकर ने पिया हलाहल, जग की पीर मिटाने को हमने पिया है गरल गमों का, हर संबंध बचाने को॥…
Read More » -
धुनिया
लोकमन का पात्र वह धुनिया,प्रतिदिन गाँव से चलता,वन के रास्ते से गुजरता,शहर जाकर अपनी आजीविका करता और पुनः दिन ढलने…
Read More » -
उडा़न
महाभारत में एक शिक्षा प्रद कथानक है कि- दक्षिण सागर तट पर मान सरोवर के हंँसों का एक परिवार प्रवास…
Read More » -
अपनी-अपनी खुशी
बीच बाज़ार में कुछ बच्चे गुब्बारे बेंच रहे थे कुछ धनाढ्य बच्चे गुब्बारे खरीद रहे थे बेचने खरीदने वाले दोनों…
Read More » -
माँ की महिमा
माॅं लगा ली आस तेरी ज्योति की दरबार में। छलकते आंसू बहाए माॅं तुम्हारे प्यार में। — रूप है तेरा…
Read More » -
देव-मन्दिर
एगो पुरान दंत कथा ह- तीन आदमी ठेला में पाथर ढोवत रहलं। बारी बारी से पुछाइल कि-उ का करत हं?…
Read More » -
ग़ज़ल
दिखा रहा जो आसमान को उस दर्पण को चांद मुबारक। झांक रही जो रोशन किरणें उन किरणों को चांद मुबारक।…
Read More »