साहित्य
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गज़ल
चला जिस ओर तू क्या सोचता है बस बहारें हैं। जो अपना छोड़ दर जाते वही टूटे सितारे हैं। पराई…
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बचपन की कहानियां
बचपन की वो अजब गजब कहानियां ख्याल आते ही मन में छा जाती है जवानियां वो अल्हड़ मस्ती में हो…
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ग़ज़ल
दीप खुशियों के जगमगाए हैं। आप जब भी करीब आए हैं।। आपको भूलना है नामुमकिन, आपको दिल में हम बसाए…
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आअब लौट चलें,प्रकृति की गोद में
1 आ अब लौट चलें प्रकृति की गोद में। उसी शुद्ध स्वच्छ शीतल अमोद – प्रमोद में।। वरदायिनी धरती माँ…
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छोटी छोटी बातें
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाए, नज़रें कमज़ोर होती जाएँ। छोटे अक्षर धुँधले दिखते हैं, पर मन की आँखें सब पढ़ जाएँ।…
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अब कोई बेबसी नहीं
चुलबुली बिंदास और घर की लाडली, चली आई दुल्हन बनकर वो ऐसे घर । जहां नारी की न इज्जत न…
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भगवान परसुराम
ये पड़े प्रसून पृथ्वी पे प्रभु परशुराम पधारे हैं । अन्यायी थे नृपत जो भी वही इनने संहारे हैं।। अच्युत…
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ऊँची दुकान फीका पकवान: मुहावरे और विद्यार्थी
ऊँची दुकान फीका पकवान, यानी बाहरी दिखावा अधिक हो और गुणकर्म बहुत ही कम हो, पर वास्तव में वस्तु में…
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बिना तयारी के त्यार बैठी हैं
में बांधी नहीं , बांधा गया था मुझे , खुद की मर्जी से नहीं , जबरदस्ती मुझे , सबको रोका…
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गज़ल
आज मैं उस गली को भूल गया गो कि मैं जिन्दगी को भूल गया। आइना देखता रहा मुझ को देखता…
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