साहित्य

  • एक स्त्री घर में

    एक स्त्री घर में जो खुश दिखाई दे रही है जो हंस रही है यह सब पुरुष के लिये एक…

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  • मजबूर है जनता की सरकार

    भ्रष्टाचारी तुमको है    अब धिक्कार हर दफ्तर में तेरी खुद की है सरकार देश की जनता की  नजर में…

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  • हिम्मत

    छुप-छुप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ लुटाने वालों, कुछ सपनों के मर जाने से जीवन मरा नही करते हैं। ठोकर…

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  • उम्र के उस दौर में

    उम्र के उस दौर में आ गए हैं हम, सबसे बेझिझक बातें अब करने लगे हैं। परवाह नहीं करते हैं…

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  • पेड़ बोल उठे

    मत काटो पेड़ों को— ये लकड़ी नहीं, ये हमारी साँसों के मूक प्रहरी हैं। आज कुल्हाड़ी तने पर चली है,…

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  • होगी पूजा युगों युगों तक

    जीवन में कुछ करना है तो, आलस को तजना होगा। बगैर रुके और बिना थके,नित्य तुम्हें चलना होगा।। सपने बड़े…

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  • विनीता चौरासिया

    कुछ रिश्ते जो सिर्फ और सिर्फ एहसासों से जुड़े होते हैं अचानक ही खामोश हो जाते हैं ना जाने क्यों…

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  • नोबेल पुरस्कार की सनक

    नोबेल पुरस्कार की सनक ऐसी चढ़ी की, ट्रंपवा हाथ में पकड़ खुश हो रहा है। सारी दुनिया चिंतित और परेशान…

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  • आरज़ू

    ज़िन्दगी का कोई भरोसा ही नहीं कोई अपना इसमें दिखता ही नहीं!! वादे होते हैं अक्सर झूठे बोलती आंँखों को…

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  • छुआछूत

      विकास शील देश में अपने, छुआछूत है अभिशाप हुआ। प्रभु के प्रति अपराध बोध यह, मानवता के प्रति पाप…

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