साहित्य

  • कब आओगे मोहन

    कब आओगे मोहन अखियां तरह रही है दरश को तेरे ये कब से बरस रही है कहीं भूला तो ना…

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  • नारी जीवन का अर्थ,,,

    कभी-कभी मैं सोचती हूं, नारी जीवन का क्या अर्थ है? दूसरों पर हर पल निर्भर रहे, क्या उसका जीवन व्यर्थ…

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  • होली

    होली आई रे आई खेलो सब मिलकर भाई खुशी से हँसना खुशी से गाना । कुछ भीगी टोली होली मे…

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  • तुम पर ही फ़िदा हूँ

    मेरी जीवनसंगिनी संगीता यादव को वैवाहिक वर्षगाँठ की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। 27 फरवरी 2026। मैं तुम्हें चाहता हूँ, तुम…

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  • लघुकथा- उधार

    “पापा! आपके बस का कुछ नहीं है। आप हमारी ज़रूरतें जब पूरी नहीं कर सकते थे तो हमें पैदा ही…

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  • बवाल मचाया ही क्यों

    अगर प्रेम मिलन करना ही था, तो इतना बवाल मचाया ही क्यों। अगर प्यार नहीं था तुम्हें मुझसे, तो इतना…

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  • होरी- रसिया

    आज रंग में खेलूंगी रसिया, व्रज में होरी मचाई रसिया! आज…! तुम तो श्याम चतुर रसिया, न समझो सीधी नार…

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  • होलिका दहन

    अग्नि-लपट में जन्मी कथा, समय सुनाता आज, अहंकारों की हार है, भक्ति का है राज। सत्ता जब अंधी हुई, टूटे…

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  • खुद करो प्रतिकार

    उठो मेरी बहना   अपनी आँसू पोछो कलियुग में कोई    कान्हा ना आयेगा हर नुक्कड़ पे   खड़ा दीख रहा शैतान…

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  • वे हंसते हैं

    वे हंंसते हैं खिल-खिलाकर ठहाकों के साथ तेजी से हंसते हैं वे हंसते हैं क्यों? वे दुनिया से कुछ छिपाते…

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