साहित्य
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रिश्तों का आधार
प्रभात की पहली किरण जब रंग बिरंगे फूलों को छूती है, तब प्रेम मौन प्रार्थना बनकर हृदय की देहरी पर…
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मोबाइल
बना जीवन मोबाइल सबका बहुत काम होता क्षण भर में बातें होती विदेश पहुंचता संदेश। है मोबाइल परिवार समाज बढ़…
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कोहरे की चादर
शीत ऋतु में जाड़े का, जुल्म बढ़े बड़ा भारी कोहरे की चादर में ,अक्सर बढ़ती मारा मारी शीत ऋतु……. आलस…
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गीत आओ सुनाऊँ एक दास्ताँ.
आओ सुनाऊँ एक दास्ताँ, बेरुजगार जवानों की। रोज देखता चिता सुलगते, मैं इनके अरमानो की।। आओ सुनाऊँ एक दास्ताँ……. गहने…
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ग़जल: मैं टूटता ख्वाब हूँ, मुझे सहारा दे कोई
मैं टूटता हुआ ख़्वाब हूँ, मुझे सहारा दे कोई उजड़ी हुई सी रूह हूँ, मुझे किनारा दे कोई थक कर…
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दिनचर्या
घर में बैठे- बैठे सामान सी हो गई मैं दूर मैं हर इंसान से हो गई मैं चिड़िया चहक उठाती…
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50-60 का दशक-अतीत की सैर का पार्ट-2
गर्मी छुट्टी में तिवरे कौड़ी,गुटटी भी था खेला। झाबर चिल्होर आइस पाइस,ये भी था खेला।। कंचा गोली गुल्ली डंडा,चिब्भी है…
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बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद -मुहावरा
पोते ने दादा से पूछा क्यों सब देते ताने, स्वाद में अदरक कैसा होता बंदर यह क्या जाने। दादा बोले…
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दिल का बीमार हूँ
दिल का बीमार हूँ बस मुझको दवा दे कोई बुझते दीये को ज़रा आके जला दे कोई मेरी इतनी ही…
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माता पिता की सेवा
नव मानवतावाद से,अच्छे करना काम। मात पिता की सेवा से,मिलता है आराम।। नन्हा बालक तू रहा,तेरा रखते ध्यान। गीले में…
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