साहित्य

  • वंदना माँ वीणावादिनी

    श्वेत कमल पर विराजित माँ, हंस संग करतीं पथ-प्रदर्शन। शुभ्र वसन में ज्योति स्वरूपा, ज्ञान-सुधा का करतीं सिंचन। वीणा की…

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  • बेटियाँ

    सृष्टि के निर्माण को, होती हैं बेटियाँ, कूड़े के ढेर को नहीं, होती हैं बेटियाँ। बेटों का क्या, घरबार बसाकर…

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  • जीवन का रिश्ता

    रिश्तो को जीना होता है ज़हर मिले तो पीना होता है!! मेरी बात कहांँ तक पहुंँची रिश्तो को कहना होता…

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  • दिन बढ़ती जा रही

    दिन-दिन बढ़ती जा रही, रिश्तों में तकरार। बढ़ी आपसी दूरियाँ, आँगन में दीवार।। आत्ममुग्धता बढ़ गई, बदले सोच विचार। कुंठित…

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  • भैंस के आगे बीन बजाना – मुहावरा

    पोता बोला दादा जी से इसका तुम अर्थ बताओ, क्यों मानव कहते यहाँ, भैंस के आगे बीन बजाओ। न समझने…

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  • मुक्तक

    न जाने कितने रफू किये हैं हमने इस नाजुक दिल पर । मुस्कानों के सिले हैं पेमद हमने इस नाजुक…

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  • चमकते रेत को

    चमकते रेत को वो लोग आब लिखने लगे। बुझे चराग को भी आफताब लिखने लगे।। नहीं जो जानते मतलब रईस…

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  • आखिरी पन्ना

    अंतिम सांसें गिनने तक मैं आखरी पन्ने लिख पाई, शोर मचाया सबने शमशान तक पहुंचाओ भाई। बस चंद सांसें चल…

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  • मैं और मेरा काव्य

    मैं और मेरा काव्य …., मैं कौन हूँ क्या ,पहचान है मेरी यही की …,मैं शब्दों की पिरोयी गई माला…

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  • लोहड़ी मकर संक्रांति त्योंहार

    आया लोहड़ी,मकर संक्रांति त्योंहार, मन में छाई खुशियां अपार, आओ मिलकर खुशी मनाएं, प्यार के रंग में सब रंग जाए।…

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