साहित्य
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ग़ज़ल_ ढली उल्फत जो अश्कों में
नहीं अब पास आते ये,हिचकने हैँ लगे रिश्ते। पनाहो में जो गैरों के,बिलखने हैं लगे रिश्ते। लगे लगने न जाने…
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मकर संक्रांति पर्व
बड़ा ही शुभ दिन आज मकर संक्रांति आई रे झूम उठे नर और नार मकर संक्रांति आई रे। संघार किया…
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कलम मेरी पहचान
कलम कोई साधारण औज़ार नहीं, यह मेरे भीतर की सच्चाई की जुबान है, जो मैं कह न सकूँ शब्दों में,…
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खिचड़ी परब पे ग़ज़ल
हर साल मकर संक्रांति / ‘खिचड़ी महापर्व’ के मौके पर भारत की विविधतापूर्ण संस्कृति की झलक स्पष्ट दिखाई देती है,…
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नए त्योहारों की शुरुआत
भिन्न रंग भिन्न रूप फिर भी रहे सामानता भिन्न-भिन्न वेशभूषा झलके सांस्कृतिक एकता। सूर्य ने बदला स्थान चांद का पूर्ण…
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जयहिंद सैनिकों
सजगता से,निडर होकर करें रखवाली वह दैनिक। मेरा सैल्यूट है उनको, जयहिंद जयहिंद सैनिक।। सहे वो शीत,वर्षा,ताप सब, करें दिन…
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सूर्य की लालिमा
आता सूरज, जाता सूरज, कहता रहता वो तो हरदम। चाहे सुख-दु:ख की बेला हो एकभाव समभाव रहो तुम। यही नियम…
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कुण्डलिया छ्न्द मकर संक्रांति एवं पोंगल
उत्तरायण सूर्य (मकर संक्रांति एवं पोंगल पर्व) पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं । मकर संक्रांति पर्व पर, भूले सब अवसाद,…
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मकर संक्रांति
मिसेज वर्मा पूरे मौहल्ले में अकेली ऐसी महिला हैं जिन्हें हर किसी के घर के बारे में जानने की उत्सुकता…
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