साहित्य

  • सुमन बिष्ट

    सुख,इंद्रधनुष-सा क्षणिक है, जैसे नभ में आती जाती छाया, शांति,धरा की गोद में पले, जिसने मन में घर बनाया। सुख,…

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  • श्याम रंग में रंगी राधिका

    जब फागुन रंग छमकते हों, तो देख बहारें होली की, जब बाजारों में रौनक हो, तब देख बहारें होली की।…

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  • फिर आया है फागुन

    चारों तरफ़ खिले फ़ूल पलाश के सरसों की भीनी सुगंध फैली हवा में फागुन के स्वागत में प्रकृति ने किया…

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  • कल का दौर

    सच बोलने की कीमत बढ़ी, खामोशी सस्ती हुई. हर जुबान बिकाऊ मिली, जमीर की हड्डी टूटी हुई. दुआओं के बाजार…

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  • आजादी

    उन्मुक्त -स्वच्छ आकाश में मेघा करते हैं ,विचरण सदा श्वेत और श्याम रंगों में स्वछंद और मदमस्त हवाओं-संग पंछी भरते…

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  • छुअन* मालपुआ गुझिया

    रंग भरा यह उत्सव पावन,हर्षित बालक वृद्ध सभी जन। गंध सुगंध उड़े घर आँगन,माल पुआ गुझिया खुशबू धन।। रंग बिरंग…

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  • अपने रंग में कान्हा रंग दो

    अपने रंग में कान्हा रंग दो करदो मुझे निहाल। विषय वासना में मैली रहती बहुत हुई बिहाल।। लोभ- मोह माया…

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  • रक्तिम सूर्य

    आता सूरज, जाता सूरज, कहता रहता वो तो हरदम। चाहे सुख-दु:ख की बेला हो एकभाव समभाव रहो तुम। यही नियम…

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  • बसंत का मौसम बीते न!

    बहती हुई हवाओं जाना बासंती देश में जहाँ खिलते गालों पे गुलाब गोरी शरमाए बासंती वेश में! जहाँ खिलते गेंदा,…

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  • विविक्ता में न होते तुम..

    कितने विशाल कितने हो सुन्दर व्यापकता के उदाहरण हो समंदर कभी उल्लसित तो कभी हो शांत अमर्ष कभी तो कभी…

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