साहित्य

  • वसंत बहार बन कर आना

    वसंत बहार बन कर आना, फूलों की माला लेकर आना। हरियाली की चादर ओढ़कर, सबके जीवन में खुशहाली लाना। प्रकृति…

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  • मकर संक्रांति त्यौहार

    उल्लास का पर्व संक्रांति बढ़ी हृदय में और भक्ति गंगा स्नान एवं होगा दान संग बड़ों को देकर सम्मान आयी…

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  • ग़ज़ल

    आँखें  मिली  मगर  मेरी  चाहत  न मिल सकी। उल्फ़त में कोई दिल से इज़ाज़त न मिल सकी। चाहा था जिसको…

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  • हमारे त्योहार

    उत्तरायण में मौसम ने भी बदली चाल, सूर्य प्रकाश के आने से चमक रहे पर्वतों के भाल, त्योहारों के मौसम…

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  • राधे राधे

    राधे राधे बोल श्याम आएंगे। राधेश्याम की अद्भुत जोड़ी, बोला जब जब श्याम तब राधा आई दौड़ी। जीव आत्मा का…

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  • भारतीय सेना दिवस

    सीमा पर जागकर जो रातों को दिन बना देते हैं, वे अपने सुख छोड़ भारत का भाग्य जगा देते हैं।…

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  • मकर संक्रान्ति

    छल कपट दंभ द्वेष तज, चलिए हिलमिल साथ। सूरज पूजन को चलें, साथ नवायें माथ। पर्व मकर संक्रांति यह, उर्जा…

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  • छुआछूत

    छुआछूत की दीवारें, क्यों इतनी ऊंची हैं? हमारे बीच की दूरी, क्यों इतनी बढ़ी हैं? क्यों हम अलग-अलग हैं, क्यों…

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  • दिल्ली दूर बहुत है

    टूटे मन के बोझ तले, हर सपना चूर बहुत है, माना दिल्ली दूर बहुत है। बिखरे संकल्प समेटे चलना, अब…

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  • शिखरिनी छंद (हाइकु)

    संक्रांति पर्व संक्रांति सूर्य उत्तरायण आ जाती कांति ।१। ✍️ आती संक्रांति आयेगा बसंत भी रही न भ्रांति ।२। ✍️…

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