साहित्य
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भोले आ गए रे …..
भोले तो आंगन में आ गए रे, आकर सभी को बुला रहे रे, भोले तो आंगन में आ गए रे……
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कविता
फागुन आयो री सखी मौसम ने ली अंगड़ाई सखी फागुन आयो री बृज की गली गली होली के रंग में…
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फागुन की मस्ती
झूमता आया फागुन की मस्ती बहारों की रानी की है ये बस्ती पूरवाई ने ली है आज अंगड़ाई महुवा फूल…
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शैतान का कोई दीन ए इमान नहीं होता
शैतान का कोई दीन ए इमान नहीं होता होता अगर तो वह शैतान नहीं होता उसके चेले रोज मनाते है…
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जहाँ प्रेम है वहाँ द्वेष नहीं होता है
ईख में गांठ रसहीन सूखी होती है, वहां न रस और न मिठास होती है, मानव जीवन कुछ ऐसा ही…
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विभावरी -जाग री
बीत रही है यह, विभावरी जाग री —धीरे धीरे भोर का धुंधलका दे रहा है दस्तक… तिमिर और तारे भी…
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आदित्य यह ईश्वर की माया है
प्रभु प्रार्थना से ज़्यादा ताक़तवर, आस्था विश्वास से शक्तिशाली, और परमपिता परमात्मा से महान, नहीं कोई देवता है न कोई…
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क्या हिन्दू एक हुआ
क्या हिन्दू एक हुआ, ये प्रश्न गगन में गूँजे, सोई हुई चेतना अब फिर से जागे, पूँजे। टूटे हुए मन…
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साफ नियत ,नियम से चलो कि ईनाम बहुत है
1 नियम से चलो तो आराम बहुत है। ईमानदारी का भी अपना ईनाम बहुत है।। शिष्टाचार को बनाओ जीवन का…
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माँ की पाती: बिटिया के नाम
“अभी तो आई थी तू, अभी जाने की तैयारी है, ये कैसी रीत है दुनिया की, जो सब पर भारी…
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