साहित्य

  • लोहड़ी प्रेम उल्लास का पर्व

      मन को बहुत लुभा रहे, त्योहारों के रंग। रंग-बिरंगी गगन में, उड़ने लगी हैं पतंग। लेकर आई लोहड़ी, फिर…

    Read More »
  • ऊ दिन

    कईसे भूलाई ऊ दिन के जहा गरवईया आंगन मे चाउर के खुदी के प्यार से चुंगत रहल। कोयल पापिह आम…

    Read More »
  • ऊँची उड़े पतंग

    **** डोर ईश के हाथ में , उनके हाथ पतंग। ऊँची उड़े पतंग तब, खिल जाते हर रंग।।१।। *** ढील…

    Read More »
  • मुक्तक

    तन से बैठे घर पर मन से, कई मंजर हमने घूम लिए । नूर की बारिश देख वदन, कई खेत…

    Read More »
  • विश्व हिन्दी दिवस

      दस जनवरी है यादगार यह है विश्व हिन्दी दिवस। यह है अनुपम व लाभकारी जो है फैलाती ज्ञान और…

    Read More »
  • ग़ज़ल: रोटी

    महलों में सजी थाली को क्या समझ आए रोटी, झोपड़ी ने सीखा है जीना बस खाकर रोटी। दिन-रात पसीना बहा…

    Read More »
  • युवा

      युवा सदा लगा रहा, डटा रहा सुकाज में। जला स्वयं प्रखंड वो, मिला तभी सुराज है।। निशा जहाँ जला…

    Read More »
  • मेरे एहसास

    स्मृति में बसा प्यार स्मृतियों की पगडंडी पर जब तेरा नाम उभर आता है, बीते लम्हों की खुशबू से आज…

    Read More »
  • काशी: जो मेरे जेहन में बसती है

    कभी कैलाश, कभी वह काशी रमते रहते, घट घट के वासी थकते नहीं गुणगान से जिनके औघड़, साधु,संत, संन्यासी शिव…

    Read More »
  • कविता लिखती हूंँ

      मन के भावों को शब्दों का चोला पहना, भाषाई, व्याकरणिक लालित्य के आभूषण से सजा,थ स्वयं ही लिख जाती…

    Read More »
Back to top button
error: Content is protected !!