साहित्य
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जाने वाला साल
चार दिवस का जीवन मानव,सदा रहो खुशहाल। खट्टी मीठी यादें देकर, जाने वाला साल। प्रण करते हर वर्ष हे मना,…
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युग पुरुष श्री कृष्ण
**************** उस द्वापर युग के कृष्ण की भांति पुनः लो अवतार इस धरती पर , चारो तरफ फैल रहा सम्राज्य…
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ठंड झारखंड है
कंपकंपाती ठंड है, त्रासदी प्रचंड है, प्राकृतिक ये दंड है, क्यों तुझे घमंड है? मानव इधर त्रस्त है, सरकार…
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मेरे एहसास
नहीं पता मेरा तुमसे कैसा ये रिश्ता हैं यूं लगता हैं बरसों पुराना रिश्ता हैं हैं एक अनजानी सी डोर…
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बहुत सर्द है मौसम
कुछ उनकी भी सुनें जो बोल नहीं सकते हम इंसानों की तरह पर समझते हैं स्नेह औरअपनापन। जब शीत लहरें…
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वीर बाल दिवस(दोहा)
भूल गए इतिहास क्यों? पढ़े लिखे भी आज । वीर बाल के इस दिवस, बांँटे खुशी समाज।। भटक गई पीढ़ी…
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नव वर्ष में नव जीवन
बीत गया जो कल का पन्ना उसे विदा अब कर देना नई धूप की पहली किरण से मन का…
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वीर हनुमंता
राम प्रभु के भक्त हनुमंता । अंजनी पुत्र वीर बलवंता ।। पवन पिता रवि मुँह में डारे । मुनि जनों…
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ग़ज़ल
ये चरागाँ जल रहे हैं शाम से। बे ख़बर हो ग़र्दिश-ए-अय्याम से। सिर्फ मक़सद है कि रौशन हो जहाँ, वास्ता…
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गुजरते हुए साल की कविता
न बातें धरिये जी में जो बातें फिजूल हैं झाड़ फेंकिये गर्द बातों की मन मलिन न कीजिये सूर्य…
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