साहित्य

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    प्रयागराज। हिंदी साहित्य में लोकधर्मी, सहज व्यंग्य के लिए विख्यात जयचन्द प्रजापति की रचनाएँ प्रयागराज की स्थानीय बोली और रोजमर्रा…

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  • जाड़े की रात

    होती नहीं, बराबर सब की– ये जाड़े की रात सिहरती सिहरती सी। है दोरंगी दुनियाँ की क्यों अलग-अलग तस्वीर सी…

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  • रोजगार

    विषय : रोजगार रोजी रोटी की अहम् समस्या , चाहे नौकरी या रोजगार मिले । कर सकें परिवार का पालन…

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  • प्यार दुलार

    हमर संस्कार फरे , हमर दुलार फरे , हमर प्यार फरे , तोहर संसार फरे । विघ्न बाधा टरे ,…

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  • नारी सम्मान के लिए लिखा गया गीत 

    युगो युगो से नारी, रही पुरुषों पर भारी, दुनिया में हम ही ना होते, जो ना होती महतारी जब यह…

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  • “माँ”

    जब मेरा प्लास्टिक का जूता फट जाता, उसे खुद सिल कर,स्कूल भेजती थी “माँ”। फूंकनी से चूल्हे में फूंक मार…

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  • डॉ रामशंकर चंचल

    वह लड़की याद आती है, भाग 4 वह लड़की याद आती है गांव की पगडंडी से सफर शुरू करती झोपड़ी…

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  • तन हल्का मन हल्का बस कर्मों को साथ जाना है

    ****** तन हल्का मन हल्का बस कर्मों को साथ जाना है। दुआ लो दुआ दो बस यही ही सबको याद…

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  • सफ़र अनजान हैं मेरा

    सफ़र अनजान हैं मेरा सौ बहाने हमको निकले घर से अब तो जाम पिलाने हमको।।//१// मगर इस बात का रोना…

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  • शीत ऋतु

    शीत ऋतु गर्मी की तपिश गई सर्दी की ऋतु आई ठंडा ठंडा मौसम लाई भास्कर की तपिश को ठंडा कर…

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