साहित्य
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विश्वामित्र को शिष्य बन शरण दी
व्यापक अकल अनीह अज निर्गुण नाम न रूप। भगत हेतु नाना विधि, करत चरित्र अनूप। जो सर्व व्यापी हैं, निराकार…
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(no title)
पूनम का यौवन महके उजियारों सा लगता है। एक तुम्हारा जीवन बस त्योहारों सा लगता है। एक तुम्हारी खुशबू से…
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मकर संक्रांति पर जयचन्द प्रजापति ‘जय’ को मिला सम्मान पत्र
प्रयागराज 18 जनवरी 2026 (दि ग्राम टूडे) अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त श्री राम साहित्य सेवा संस्थान अयोध्या ने मकर संक्रांति के…
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खुशियों की डायरी
जीवन के हर एक पल छन को कैद किया शब्दों में एक दिन कितनी संचित खुशिया की ओर कितना दुखों…
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ये रविवार क्या होता है
ये रविवार क्या होता है, थकी साँसों की राहत होता है। छह दिनों की दौड़ के बाद, मन का सुकून,…
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क्या अपराध करता हूँ ?
आज कई दिनों बाद मित्र यमराज भागते हुए आया और पूछने लगा – प्रभु! क्या आपको भी डर लगता है?…
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प्रबुद्धा छन्द
श्रमजीवी मजदूर,सूर्योदय से शाम तक। काम करे भरपूर,जीवन गाड़ी खींचते।। जीवन गाड़ी खींचते वही,वही परिवार चलाते। अपना घर कभी नसीब…
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रिश्तों का आधार
प्रभात की पहली किरण जब रंग बिरंगे फूलों को छूती है, तब प्रेम मौन प्रार्थना बनकर हृदय की देहरी पर…
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मोबाइल
बना जीवन मोबाइल सबका बहुत काम होता क्षण भर में बातें होती विदेश पहुंचता संदेश। है मोबाइल परिवार समाज बढ़…
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कोहरे की चादर
शीत ऋतु में जाड़े का, जुल्म बढ़े बड़ा भारी कोहरे की चादर में ,अक्सर बढ़ती मारा मारी शीत ऋतु……. आलस…
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