साहित्य
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खाते हैं वो सलाम
वो चाहते हैं सलाम, दिन-रात हर प्रहार, खाते हैं वो सलाम, च्यवनप्राश की तरह। सूखे हुए से पेड़ में दहकते…
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चलो रूमानी हो जाए
चलो थोड़ा रूमानी हो जाए, मौसम भी थोड़ा सर्द हो गया, हवाओं मे भी मादकता है और, चांदनी भी सर्द…
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दिवाली में
अनेकों दीप की लड़ियाँ, हुई रोशन दिवाली में, सजे घर द्वार हैं सारे, सभी खुश मन दिवाली में। जलाएं दीप…
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भूल कहाँ
वह प्रैक्टिकल आदमी था। जो भी चाहिए ,जीने के लिए उसके पास वह सब था, गाड़ी थी ,मकान था। अच्छी…
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भूख़ा आज भी रमुआ
आदमी ! परेशान है । काग़ज़ों में – अमीर है । आज भी जो – फ़कीर है । खलिहान में…
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सब तीर चले हैं
पता नहीं क्यों दुनिया भर के हम पर ही सब तीर चले हैं। चंचल,मस्त फुदकती,उड़ती पंख हमारे उन्हें खले हैं।…
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विजय दिवस
जिस धरती ने जन्म दिया, उस पर ही अर्पित प्राण हुए, हिमगिरि की ऊँची चोटियों पर भारत माँ के मान…
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दौड़ती जिंदगी में ठहराव,,,
दौड़ती जिंदगी में ठहराव जरूरी है, भागना ही हरपल क्यों मजबूरी है? कभी सोचा हम क्या खोते जा रहे हैं?…
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अब पछताए क्या होय
अवसर दिया होता कभी, कब का उसे पहचानता।। कितना तुझे है चाहता, यह राज़ भी तू जानता।। उसकी हँसी पर…
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चौक जो बोलते हैं
नवादा में कहा जाता है कि यहाँ सिर्फ़ लोग नहीं बोलते, यहाँ चौक भी बातें करते हैं। सुबह की पहली…
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