साहित्य

  • सृष्टि , संसार दुनिया

    सृष्ट मानव तू शिष्ट नहीं , हो सकते तू अनिष्ट नहीं , भारत का चौड़ा सीना तू , जिसके होते…

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  • दबे पाँव फिर आयी सर्दी

    पड़ने लगी है चाय में अदरक, मूंगफली का सीजन आया, चने चाबने लगे लोग हैं, गज्जक और कड़ाका आया, निकल…

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  • आंसुओं को पनाह नहीं मिलती

    यह सच है –कि उनको पनाह नहीं मिलती, इस जहान में…, कब और कहाँ –आ जाये पता नहीं, सहारा मिले…

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  • मौन माधव

    *मौन माधव* माधव, आज क्यों नहीं तुम बोलते? जब तराजू में वे नयनों को तोलते। झलकती नैनों की भाषा, बीच…

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  • उल्लासित बीज

    मैंने अंकुरण किया पहले अपने मन में, जीवन के संचार के लिए। बीजो को रोपा उसमें पानी देकर उल्लास के…

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  • नर्मदा माता नमन

    नर्मदा माता नमन , तुमको हमेशा मेरा । आशीष सिर धार , प्यार पाया है तेरा ।। अवतरित हो अमरकटंक…

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  • कनक

    मुझको यारों गुनहगारों से मिलाया मत करो करते गुनाह कातिलाना फ़िर झुकाया मत करो।।//१// ऐसे लोगों को कभी भी पास…

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  • तेरा वैभव अमर रहे मां

    तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहें, तेरी सीमा पर जो अडिग खड़े हैं, वे सपूत…

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  • विजय दिवस

    बात सुनो विजय दिवस की । सुनाती हूँ कहानी अपने भारत के वीरों की । 16 दिसम्बर सन् 1971 की…

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  • तपोबल

    वन प्रान्त से गुजरते हुए एक महान ॠषि जाजलि, अचानक एक सारस पक्षी ने कर दिया उनके उपर बीट क्रोधित…

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