साहित्य

  • भाव शून्य

    शादियां भव्य हो गई है। रिश्ते शून्य हो गए हैं कैसा यह समय आया घर आंगन सब सूने हो गए…

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  • शाम का आवरण

    सुनहरी रोशनी फीकी पड़ने लगती है, एक शांतिपूर्ण सन्नाटा सूरज को ढंकती है। बादल करीब आते हैं एक गहरा साया…

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  • कौन हूँ मै

    कोई अगर जो पूछे मुझसे कौन हूँ मै, तो हंसकर बोल देती मोम सी दिखती पर पत्थर हूँ मै, कह…

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  • स्वागत बसन्त

    इमली पे आईं शोखियाँ,बसन्त आ गया झाड़ी में पकी बेरियांँ , बसन्त आ गया इमली……. वो लाल-लाल कोंपल,आमों पे आगयीं…

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  • भजन

    भगवन जी कृपा ये कर दो,जीवन में बस उमंग ही हो। अधरों पर हो नाम तुम्हारा, सेवा, सुमिरन, सत्संग हो॥…

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  • भोले संग चलूंगा

    मैं तो भोले संग चलूंगा, कदम-कदम हर रंग भरूंगा, जीवन की चलती गाड़ी में, मुस्कानों के रंग भरूंगा। मैं तो…

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  • सरस्वती वंदना सरसी छंद

    मनभावन छवि मातु तुम्हारी, करती जग उँजियार। झंकृत कर दो अंतरमन माँ, वीणा की झंकार।। वेद पुराणों की हो ज्ञाता,…

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  • इन्सान

    जो भी मिला है अब तक हमें ज़िन्दगी में ए ज़िन्दगी हमने तुझे नाज़ों से पाला है!! अच्छी रही ज़िन्दगी…

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  • टाइपराइटर

    खट पट करते वो नन्ही से बटन हजारों बातें लिख जाते थे हम मन कहते उनसे वो उंगलियों पर नाचते…

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  • वै.वि.व कर्म-१२

    चन्द माह का लेकर अवसर वह,धर्मनिष्ठ काशी धाम को आया। माँगा उसने आकर धर्म व्यवस्था,यवनी को कैसे जाये अपनाया।। रक्त…

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