साहित्य
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बंदर वाला ( कहानी )
साईकिल के पैडल मारता, गाँव की पगडंडी से घर की ओर लौटता झुमरु, आज जितना उदास था,उतने ही उदास थे…
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अपने लिए जलाया दीप
लघु कथा अनन्या कई दिनों से भीतर ही भीतर थकी हुई थी। कोई बड़ा कारण नहीं था—बस अपेक्षाएँ थीं, तुलना…
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लघु कथा — “चौक जो बोलते हैं”
नवादा में कहा जाता है कि यहाँ सिर्फ़ लोग नहीं बोलते, यहाँ चौक भी बातें करते हैं। सुबह की पहली…
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छंद की कार्यशाला
कहो आज कोई नई सी कहानी। उमंगो भरी सत्य गाथा पुरानी।। न राजा न रानी न हो राजधानी। जवानी दिवानी…
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आज के दिव्यांगजन
अंग विछिन्न हुए हैं इनके, पर नहीं किसी से कम तो हैं। अच्छे- अच्छे कर सके न जो, उनमें करने…
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लौह पुरुष — वल्लभभाई पटेल
लौह थे आप, पर कठोर नहीं— आपकी दृढ़ता में करुणा की नमी थी। टूटते भारत को आपने एक नाम दिया—…
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एक गज़ल
जरूरत है सभी को कौन कितना बांट पाएगा किया खुद का भरोसा ही हमेशा काम आएगा। समय की धार है…
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पटेल जी की पुण्यतिथि पर विशेष ‘भारत के लौह पुरुष’
लोहे जैसी इच्छाशक्ति, ‘भारत के लौह पुरुष’ कहलाएँ आप! अंत के तम में,न बुझे वो अरमान आप! माँ, भारतीय के…
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भोर की प्रतीक्षा
रैन को है – भोर की प्रतीक्षा । शशि भी – निकला नहीं मेघों से । तारे भी – त्रस्त…
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मुर्गों की चतुराई…. बाल-कहानी
मुर्गों की चतुराई…. बाल-कहानी …….. एक बार की बात है, एक छोटे से गांव में सारे मुर्गे बहुत दुखी थे।…
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