साहित्य
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ये रविवार क्या होता है
ये रविवार क्या होता है, थकी साँसों की राहत होता है। छह दिनों की दौड़ के बाद, मन का सुकून,…
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क्या अपराध करता हूँ ?
आज कई दिनों बाद मित्र यमराज भागते हुए आया और पूछने लगा – प्रभु! क्या आपको भी डर लगता है?…
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प्रबुद्धा छन्द
श्रमजीवी मजदूर,सूर्योदय से शाम तक। काम करे भरपूर,जीवन गाड़ी खींचते।। जीवन गाड़ी खींचते वही,वही परिवार चलाते। अपना घर कभी नसीब…
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रिश्तों का आधार
प्रभात की पहली किरण जब रंग बिरंगे फूलों को छूती है, तब प्रेम मौन प्रार्थना बनकर हृदय की देहरी पर…
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मोबाइल
बना जीवन मोबाइल सबका बहुत काम होता क्षण भर में बातें होती विदेश पहुंचता संदेश। है मोबाइल परिवार समाज बढ़…
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कोहरे की चादर
शीत ऋतु में जाड़े का, जुल्म बढ़े बड़ा भारी कोहरे की चादर में ,अक्सर बढ़ती मारा मारी शीत ऋतु……. आलस…
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गीत आओ सुनाऊँ एक दास्ताँ.
आओ सुनाऊँ एक दास्ताँ, बेरुजगार जवानों की। रोज देखता चिता सुलगते, मैं इनके अरमानो की।। आओ सुनाऊँ एक दास्ताँ……. गहने…
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ग़जल: मैं टूटता ख्वाब हूँ, मुझे सहारा दे कोई
मैं टूटता हुआ ख़्वाब हूँ, मुझे सहारा दे कोई उजड़ी हुई सी रूह हूँ, मुझे किनारा दे कोई थक कर…
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दिनचर्या
घर में बैठे- बैठे सामान सी हो गई मैं दूर मैं हर इंसान से हो गई मैं चिड़िया चहक उठाती…
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50-60 का दशक-अतीत की सैर का पार्ट-2
गर्मी छुट्टी में तिवरे कौड़ी,गुटटी भी था खेला। झाबर चिल्होर आइस पाइस,ये भी था खेला।। कंचा गोली गुल्ली डंडा,चिब्भी है…
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