साहित्य
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बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद -मुहावरा
पोते ने दादा से पूछा क्यों सब देते ताने, स्वाद में अदरक कैसा होता बंदर यह क्या जाने। दादा बोले…
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दिल का बीमार हूँ
दिल का बीमार हूँ बस मुझको दवा दे कोई बुझते दीये को ज़रा आके जला दे कोई मेरी इतनी ही…
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माता पिता की सेवा
नव मानवतावाद से,अच्छे करना काम। मात पिता की सेवा से,मिलता है आराम।। नन्हा बालक तू रहा,तेरा रखते ध्यान। गीले में…
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एक स्त्री घर में
एक स्त्री घर में जो खुश दिखाई दे रही है जो हंस रही है यह सब पुरुष के लिये एक…
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मजबूर है जनता की सरकार
भ्रष्टाचारी तुमको है अब धिक्कार हर दफ्तर में तेरी खुद की है सरकार देश की जनता की नजर में…
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हिम्मत
छुप-छुप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ लुटाने वालों, कुछ सपनों के मर जाने से जीवन मरा नही करते हैं। ठोकर…
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उम्र के उस दौर में
उम्र के उस दौर में आ गए हैं हम, सबसे बेझिझक बातें अब करने लगे हैं। परवाह नहीं करते हैं…
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पेड़ बोल उठे
मत काटो पेड़ों को— ये लकड़ी नहीं, ये हमारी साँसों के मूक प्रहरी हैं। आज कुल्हाड़ी तने पर चली है,…
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होगी पूजा युगों युगों तक
जीवन में कुछ करना है तो, आलस को तजना होगा। बगैर रुके और बिना थके,नित्य तुम्हें चलना होगा।। सपने बड़े…
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विनीता चौरासिया
कुछ रिश्ते जो सिर्फ और सिर्फ एहसासों से जुड़े होते हैं अचानक ही खामोश हो जाते हैं ना जाने क्यों…
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