साहित्य

  • जहां कदम ठहरते हैं

    जिंदगी वहां तक नहीं, जहां तक हमारे कदम चले। जिंदगी वहां पर भी है, जहां आकर हमारे कदम ठहर गए।…

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  • पागल बन के

    पागल बन के पागल बन के खिलता जाए दिल से दिल मिलता जाए।। जब जब आती यादों में वो दिल…

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  • गुलाबी ठँड

    गुलाबी ठंड में जब से तेरी क़ुर्बत मिली है, सर्द रातों को भी अब एक नर्मी मिली है। तेरी साँसों…

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  • मीठे बोल

    कीचड़ जो फेंका तुमने मुझे गिराने की चाह में, मैंने वही कीचड़ सींच दिया अपनी राह के फूलों में। तुम्हारे…

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  • माॅ और ममता

    “माँ” महाभारत का एक प्रसंग है कुन्ती के द्वारा पांडवों को कर्ण के सहोदर भाई बताये जाने के बाद युधिष्ठिर…

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  • ज़िन्दगी

    बहुत कुछ समझाकर जाती है ज़िन्दगी, हँसाकर कई बार रुला जाती है ज़िन्दगी। जी लो पल- पल को, मुस्कुराकर दोस्तों,…

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  • हेमंत का शीत

    * प्रकृति नटी नवयौवना,पल-पल बदले रूप। कभी शिशिर,हेमंत हैं,कभी ग्रीष्म की धूप।। * शीत वेग बढ़ने लगा , निकले स्वेटर…

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  • लघु कथा किरदार पिता का ,,

    मेरी सरकारी नौकरी लगी थी एक बहुत दूर गांव में जो संवेदनशील कहां जाता था, सरकारी नौकरी कहा नसीब थी…

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  • चाँद के मिजाज से

    चाँद मेरी बात पे, नखरे वो करता है क्यूँ कहता हूँ आ जाओ घर, आने से डरता है क्यूँ क्यूँ…

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  • गिरिधारी

    धर ध्यान सुनो गिरधारी बिहारी गिर न परें । हम सब है शरण में तिहारी बिहारी गिर न परे ।।…

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