साहित्य

मुखौटे

सौ, भावना मोहन

चेहरे पर लगाकर मुखौटे,

जाने लोग कैसे जीते हैं?

चेहरे पर मुस्कान रखकर,

कैसे दर्द के घूंट पीते हैं?

 

जमाना बदल गया है,

सच्चाई किसी को पसंद नहीं।

झूठ का मुखौटा लगाया है,

सादगी किसी को पसंद नहीं।

 

चेहरा झूठा नहीं बोलता,

मुखौटे की अपनी कहानी है।

मुखौटा देखकर कैसे समझे,

किसकी क्या कहानी है?

 

जिंदगी के रिश्ते में अक्सर,

सब अभिनय करते हैं।

कौन सा सच्चा है कौन झूठा?

जाने कैसे पता करते हैं।

 

मुखौटा उतार कर सामने आओ,

अच्छाई से जिंदगी बितानी है।

मुखौटे कभी साथ नहीं देते,

यह सच्चाई सबको बतानी है।

 

सौ, भावना मोहन विधानी ✍️

अमरावती महाराष्ट्र।

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