साहित्य
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वह खाली आसन
आज फिर आपकी पुण्यतिथि है, पिता! और समय की लंबी नदी के किनारे बैठा मैं अपनी ही परछाइयों से प्रश्न…
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दोराहा
“दोराहा” चलना ही मेरी ज़िंदगी, रुकना है मौत मेरी। दोराहे पर खड़ी हूँ, बस इकराह है पकड़नी। जिस राह…
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प्रेम प्यास है
रचित गीत संगीत शारदे। ललित राग का ज्ञान शारदे सरल भाव का प्रेम है जहाँ। अमित रीति का प्यार है…
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मर्यादा की सीमा कभी लाँघना नहीं
मर्यादा न क़ैद है, न दीवार, ये है संस्कार की ऊँची मीनार, बोलने से पहले तोले शब्दों को, समझो रिश्तों…
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राजनीतिक, प्रशासनिक,धार्मिक,विधिक और नैतिक -व्यवस्था का गिरता हुआ स्तर
1.)हर समय पर दूसरों की सहायता के लिये उपलब्ध होकर हम खुद अपने लिये मुसीबत पैदा करते हैं।हर समय पर…
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गीत
बीड़ी में कश मार-मार कर, चस्का खूब लगाया । खेल-खेल में मित्रों ने भी, मुँह से धुआँ उड़ाया ।।१।। ✍️…
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राम प्राणनाथ हमारे
राम-चंद्र हैं जीवन-नभ के, आशा-दीपक ज्योति महान। भक्ति-सरिता बहती उर में, पाकर उनका शुभ वरदान॥ मन-मंदिर के देव वही…
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गजल सृजन
हो गया प्यारा मुझे वह नाम से, मन महक उठता सदा श्रीराम से। प्रेम की खुशबू मिली बस धाम…
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ख़ुशी
बहुत दिनों बाद पकड़ में आई… “खुशी”..तो पूछा ? कहाँ रहती हो आजकल…. ? अब तो मिलती भी नहीं..? जवाब…
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ग़ज़ल
तुम्हारे ख्यालों की महक जो उड़ी , मेरी धड़कनों की वो ग़ज़ल बन गई। ख्वाबों के आंगन में खिलती…
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