साहित्य
-
जो मकान को घर बना दे,वो पत्नी होती है
1 जो एक की सौ सुना दे वो पत्नी होती है। जो भक्ति की लौ जगा दे वो पत्नी होती…
Read More » -
ग़ज़ल
जो चराग़ तूने जला लिया उसे क्यों बुझा दिया अपना बना के दिल से क्यूँ तुमने हमें गिरा दिया। ये…
Read More » -
चांद का दीदार
करवा चौथ और ईद के त्योहार पर, चांद का दीदार शुभ माना जाता है। चांद की होती है यहां मन…
Read More » -
ग़ज़ल
भक्ति मीरा सी मन में जगाने लगी, श्याम मुरली की धुन गुनगुनाने लगी।। नाम कान्हा का जब भी लिया प्रेम…
Read More » -
ये रिश्तों की मर्यादा भूलकर आपस में लड़वाते है
ये रिश्तों की मर्यादा भूलकर क्यों आपस में लड़ जाते हैं, जेहाद के नारे देकर क्यों मासूमों को भरमाते हैं।…
Read More » -
रोला छंद
मानव का उत्थान, पृथक क्या जग से होता। स्वार्थ पूर्ति के बीज, न जाने क्यों वह बोता।। अहम् भाव से…
Read More » -
सुध-बुध खोती सुनकर मुरली
कान्हा के नित दर्शन को अब, व्याकुल है राधा न्यारी। सुध-बुध खोती सुनकर मुरली, बोल रही राधा प्यारी॥ वृन्दावन के…
Read More » -
चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात – लोकोक्ति
चार दिन की चांदनी यहाँ फिर अंधियारी रात, दादाजी मुझको समझाओ आई कहाँ से बात? दादा बोले, सुख दुःख दोनों…
Read More » -
दर्द की छाया
दर्द की छाया चेहरे पर आ ही जाती है। दिल कितना भी छुपाना चाहे, आँखें कह ही देतीं हैं।…
Read More » -
मित्र
चौपई/जयकरी छंद कर लो तुम कितना भी प्यार। फिर भी कुछ खाते हैं खार ।। आस्तीन के हैं वही सांँप…
Read More »