साहित्य

  • ग़ज़ल

    क्या खोना क्या पाना है यह मजदूरी का दाना है । पेट भरो फिर काम चलो इतना ताना- बना है…

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  • कड़ी धूप में श्रमिक

    कड़ी धूप में श्रमिक पसीना बनता जीवन तुम्हारे लिए ईंटों का भार उठाता चुपचाप गढ़ता दुनिया तुम्हारे लिए रोटी की…

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  • मजदूर

    कठिन परिश्रम कर सदा,पाले निज परिवार। शीत ताप वर्षा सहे,सँग मौसम की मार। भवन कारखाने सभी, करता है निर्माण, अन्न…

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  • श्रमिक दिवस पर (कुंडलियाँ)

    महँगाई के दौर में, बेबस है मजदूर। गार रहा तन काम कर, हो- होकर मजबूर। हो-होकर मजबूर, नहीं अब काम-…

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  • मजदूर

    अर्थ स्वरूप आधार, रहते हैं निराहार, आत्मनिर्भर अटूट, करते साधना। मेहनत की मिशाल, बने स्वयं की ढाल, बहाते खूब पसीना,…

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  • बुद्ध पूर्णिमा है खास

    क्या है जीवन का लक्ष्य बुद्ध हमें सिखाते हैं । सत्य अहिंसा को अपनाओ, जीवन में करुणा जगाओ। साथ हमारे…

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  • में तो मजदूर हूं मजदूरी करूंगा

    मैं तो मजदूर हूँ, मजदूरी करूँगा, मेहनत की रोटी से पेट भरूँगा। फटे हुए कपड़ों में सपने सजाए, आँखों में…

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  • मजदूर दिवस

    मै मजदूर हूँ मुझे महलों की बस्ती से क्या है, अपना पसीना बहाकर अगणित बार धरा पर मैने स्वर्ग बनाएं…

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  • मजदूर दिवस

    हम सब तो मजदूर ही हैं,फिर क्यूं कर इसे मनाते, एक दूजे की हम करें प्रशंसा, स्नेह सहज अपनाते, श्रम…

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  • मजदूर: सृजन का आधार

      एक मई की इस सुबह, चलो उन्हें सलाम करें, जो दिन-रात खटते हैं, आओ उनका सम्मान करें। मैं चलती…

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