साहित्य

  • जीवन का सार

    प्रेम और समर्पण से, भगवान की भक्ति ही जीवन का सार है। इस पावन मार्ग पर चलना, सबसे बड़ा संस्कार…

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  • श्रम

    दिन के पीछे रात बनी है , रात के पीछे बना दिन । दिन बना है यह श्रम को ,…

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  • विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस

    कागज़ की महक में बसा है जहान, सियाही से लिखी हर एक दास्तान। पुस्तकें नहीं, ये खिड़कियाँ हैं, जिनसे दिखता…

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  • लघु कथा आओ,रूह से मिलता हूं

    राग द्वेश जाति धर्म राजनीति ऊंच नीच अमीर गरीब आदि सैकड़ों सड़ी मानसिकता में जी रही दुनिया में जब कोई…

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  • होंसले को सदैव रखना

    होंसले को सदैव रखना।। होंसले को सदैव रखना।। खोना नहीं निराशाओं में कहीं, अपने मन में एक जुनून रखना। तुम…

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  • भूख

    जब हम उलझे थे शरीर को स्वस्थ बनाने में। समझ नहीं पा रहे थे क्या घटाएं, क्या बढ़ाएं अपने खाने…

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  • भारत

    सब जन भारत महिमा गाएं, नव आभा से जागृत रहिए। कुसमित पल्लव शोभित प्यारा, मन्द पवन का झौंका बनिए।। जीने…

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  • पहलगाम की त्रासदी

    बिंदिया छूटी,चूड़ियाँ टूटी,सूनी हुई कलाई घाटी पहलगाम में….. दर्द में बदल गयी शहनाई,कैसी आफत आई मेरे पहलगाम में…. खुश हो…

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  • चीलर सफेदपोश बना रहता है (हास्य-व्यंग्य)

    चीलर कपड़ों के अंदर पाये जाते हैं। खासकर जो सबसे अंदर पहने जाते हैं। रक्तचूसक परजीवी होता है। सफेद दिखाई…

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  • दिल

    मोहब्बत वो सफ़र है जो कभी तय ही नहीं होता!! सोचता हूंँ तू तू ना रहती और मैं मैं ना…

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