साहित्य
-
पृथ्वी
धरा पर इतना बोझ ना डालो पृथ्वी दिवस पर सौगंध उठा लो!! प्रकृति का सौंदर्य है हरियाली बाग और वृक्ष…
Read More » -
बचाओ यह जीवन आधार
पृथ्वी दिवस पर जनमानस से हरियाली की सुरक्षा के लिए सचेत करते हुए करूँ पुकार धरती माँ की गोद में,…
Read More » -
जीत का जश्न मनाएगा
परिवार का बच्चों पर, पड़ने लगा दबाव है। पड़ोसी को हराने का, सर पर चढ़ा शबाब है।। अंकों की गिनती…
Read More » -
कविता
जीवन की फूल बगिया को हमने बहुत सजाया है अनगिन वृक्ष लगाकर हमने पर्यावरण बचाया है। वृक्षों की महिमा है…
Read More » -
विश्व पृथ्वी दिवस
धरती ने चुपके से मुझसे कहा, “कब तक यूँ ही मुझको तुम जलाओगे?” मैंने झुककर उसका हाथ थामा, पर उत्तर…
Read More » -
संतुलित आबादी
ठहरता आसमान रुकती जमीन कहती सिमट गई नदियां टूट गए पर्वत कट गए , छाव देते हुए वृक्ष आओ अलख…
Read More » -
वृक्षों की पुकार (विश्व पृथ्वी दिवस विशेष)
विकास की अंधी दौड़ में वृक्षों को बेरहमी से काटा है हमने स्वार्थ की इस अंधी चाह में प्रकृति को…
Read More » -
माँ पृथ्वी! तुम कितनी महान!
माँ पृथ्वी! तुम कितनी महान! उपकारों का नहीं कोई प्रतिदान! आश्रय देती जीव-अजीव सभी को स्नेह से सींचती वनस्पतियों को…
Read More » -
क्यों करें तू अवसाद
आया है सावन और हो रही है प्रलयंकारी बरसात ए मानव अब i क्यों करें तू अवसाद। पेड़ों को जब…
Read More » -
गज़ल
धरा पर पेड़ पौधे से चलो रिश्ते सॅंवरते हैं। कहीं पौधे इमारत के कहीं औषधि धरते हैं।। बसा हो घर…
Read More »