साहित्य
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दोहा – पृथ्वी दिवस विशेष
पृथ्वी दिवस मना सभी, दिखा रहे सम्मान कर दूषित वसुधा यहाँ, करते हैं अपमान ।। रोपण वृक्षों का करो, सभी…
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पृथ्वी दिवस
धरा का मिल कर करें श्रृंगार। वृक्ष लगाकर हजार और हजार।। वही हरियाली प्रकृति को लौटा दें। जैसे सौंपी थी…
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वृक्ष की पुकार
शुष्क हुआ मैं, देह हुई है जर्जर, हे मानव! यह क्या किया तूने बन दानव? कभी पल्लव, पुष्प, फलों से…
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ज्ञान का अमर दीप
शब्दों में बसा है युगों का सार, शास्त्र हैं मानवता का आधार। अनुभव अग्नि में तपकर निकले। सत्य के दीपक…
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पृथ्वी दिवस
आदिकाल से पृथ्वी माँ को पूजते देती चराचर को शरण अन्नपूर्णा बन कर करे पालन स्वार्थ में इंसान ने भू…
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पुस्तक दिवस
मार्ग सही दिखला कर बालक, पुस्तक शिक्षित नित्य करे । वेद पढ़ो रखता हिय शीतल, अंतस में वह ज्ञान भरे…
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पुस्तक दिवस : छंद
पुस्तक सच्ची मित्र हैं, खुशियों का आधार। इनमें ही मिलता सदा, जीवन का सब सार।। खोज हुई कागज तभी, मिलकर…
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मेरे दो शब्द
दि ग्राम टुडे के आदरणीय,सम्मानीय सम्पादक डॉ शिवेश्वर दत्त पाण्डेय जी सादर प्रणाम। साहित्य के प्रति आपके सहयोग पर कुछ…
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विश्व पृथ्वी दिवस पर कुछ पंक्तियां
आज विश्व पृथ्वी दिवस पर जरा चर्चा कर लें आज, रूखी सूखी पृथ्वी है धीमें धीमें ले रही सांस। बंद…
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विश्व पृथ्वी दिवस
जब होगी हरी भरी धरा हमारी, पेड़ों की घनी छाँव भी होगी, हरियाली से प्रफुल्लित होकर जग में खुशहाली छायेगी…
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