साहित्य

दूर अज्ञान के हो अंधेरे, विडियो 

डॉ रामशंकर

डॉ रामशंकर चंचल के गेल लिमिटेड गेलर बड़ी झाबुआ के सार्थक आयोजन हिन्दी भाषा के गरिमामय अस्तित्व को बरकार रखता हुआ और वो गली वो मकान हिन्दी इतिहास रचती कृति इंकलाब पब्लिकेशन बंबई द्वारा प्रकाशित सागर जख्मी साहब के सदा ही मिलते पुस्त और आशीष से दस्तक देती अमेज़न पर उपलब्ध, 15वीं कृति को लेकर उनकी बेटी बेला संकेत नागर द्वारा बनाया जाता विडियो गीत के अद्भुत महत्व को सामने रखता आयोजन सचित्र गरिमा देता यह सोशल मीडिया पर दस्तक देता एक ही दिन में हजारों हजारों द्वारा बधाई बंटोर रहा है और सोशल मीडिया पर झाबुआ मध्य प्रदेश आदिवासी जिले को गर्व महसूस करता हुआ आदर और सम्मान पा रहा है देश के ख्यातीप्राप्त दैनिक समाचार के अद्भुत स्नेह और आशीष को सामने रखते हुए वंदनीय धरा झाबुआ को सभी हजारों हस्तियां द्वारा सराही जा रहा है जिसे सदा की तरह सहज भाव से डॉ रामशंकर चंचल ईश्वरीय आशीष है रूह आशीष है इसके सिवा क्या हो सकता हैं मुझ जैसे नाचीज़ को इतना प्यार और आशीष मिले सब कुछ वो है केवल वो जिसे हम सब ईश्वर कहते है

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