आलेख

प्रकाशक सागर ज़ख्मी साहब और मेरा रिश्ता, सोचा नहीं कभी मैंने

डॉ रामशंकर चंचल

मेरे वॉट्स पर सैकड़ों मित्र हैं नहीं जानता हूं सभी को सत्य हैं उसी में एक सागर ज़ख्मी साहब भी हैं, कुछ सालों से मेरी डाली गई रचनाओं आदि को देखा करते थे और कभी कभी राधे कृष्ण लिख देते थे बस इतना मुझे नहीं पता था यह देश के चर्चित बहुत बड़े प्रकाशक हैं
एक दिन कितने साल बाद एक पोस्ट भेजी मुझे अपनी प्रकाशक होने की कृतियों के बस वैसे ही अनमने मन से लिख दिया यहां कुछ कविता भेज रहा हूं मैं किताब निकलना चाहता हूं
वो तैयार हो गए बोले सर जी मैं आपकोपढ़ता हूं अच्छे से जानता हूं मेरे गुरु है आदरणीय आप से सीखा हूं आदि सम्मान और आदर के साथ में चौक गया पर विश्वास था होगा सही कह रहे हैं क्योंकि सैकड़ों है ऐसे भी सर जी आपको देख कर लिखने लगा , कोई आपका ध्येय करता मेरी कविता बन जाती आदि आदि अनेक बात चाहने वाले मुझे पढ़ने वाले करते हैं कोई कहती सर जी आप से प्रेम हो गया सब कुछ सही लगता हैं मुझे
क्यों कि मैं खुद जब भी रूह को देख लेता मात्र देखने मात्र से सैकड़ों रचना जन्म लेती और अजीब ऊर्जा ताकत मिलती यही उसकी रूह की हालत थे देखा है सब कुछ परम् शक्ति ईश्वर के हाथ में है वो जो चाहता है घर बैठे मिलता है देखता है वह सब कुछ फिर चौका देता है जो कभी संभव नहीं

खैर वही हुआ अद्भुत मित्रता बनी उन्हें भी उतना अच्छा लगा जितना मुझे सिलसला चला चल रहा है बाकी सब कुछ राम जाने

मुझे फेस बुक चलाने और वाट्स चलाने के अलावा कुछ नहीं आता यहां भी जो लिख दिया लिख दिया
गलत भी लिखा गया तो सही करते नहीं आता

खैर चल रहा है ईश्वर कृपा से अद्भुत सुखद किसी देवत्व आशीर्वाद की तरह जानता है मैं कुछ नहीं होता है केवल ईश्वर है जो किसी न किसी रूप में साथ है परम् सत्य है
चाहिए चरित्र अच्छा हो क्रम अच्छा हो और उसके प्रति आस्था और आत्मविश्वास फिर आपकी जितनी साधना है उतना प्रतिफल मिलना तय है घर बैठे सब कुछ ईश्वर खुद देगा और वही सब करता है
राग द्वेष छल कपट जाति धर्म राजनीति आदि आदि सैकड़ों वैराग आलाप रही दुनिया से दूर रहे केवल अपना कर्म करे जो सभी के हित हो
समझे पूर्ण आस्था से ईश्वर है आप के साथ एक नाराज हुआ या जलन ईर्ष्या से आपके खिलाफ हुआ तो सैकड़ों ईश्वर कृपा से और अच्छे मिल जाते है सब कुछ देख रहा है जीवन में घर बैठे
मानवीय सोच और चिंतन के साथ विश्व मानव मात्र के लिए सदा ही हर पल अच्छा सोचे यही ईश्वर है सब के भीतर जैसा आप सोचेंगे वैसा वह भी
आपके बारे में सत्य है
प्रणाम उस ईश्वर शक्ति को जिसने एक देश और विश्व के सैकड़ों हस्तियों से घर बैठे मिला दिया और बिना कभी फोन पर बात किए उनका सभी का अथाह प्यार आशीष से सब कुछ संभव हुआ
राम जाना उसकी महिमा

 

डॉ रामशंकर चंचल

झाबुआ मध्य प्रदेश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!