
मिला न लक्ष्य तो क्या
न हार से तू घबरा
ले साध अपना लक्ष्य और
फिर से एक क़दम बढ़ा॥१
इच्छाशक्ति तेरा शस्त्र है
तू ज़रा संकल्प तो उठा
जीता है जिसने विश्व को
वो संकल्प ही तो था॥२
प्रकृति की श्रेष्ठ कृति है शिशु
ये फूल धरा की गोद में खिला
विवेक, बुद्धि, शक्ति से समयानुसार विचारों को गाढ़ा॥३
वक़्त के साथ कदम मिला
तू आगे ही बढ़ता चल
निरंतर प्रयासों का श्रम
करता है सबको सफल॥४
न कभी हौसला तू हार
अपने भरोसे को बढ़ा
हर विघ्न को तू चीरकर
पताका विजय फहरा॥५
संघर्ष के हर पथ पर
बेशक़ कष्ट हैं हज़ार
न रुको वहाँ, जहाँ कई
नाकामियां खड़ी बेज़ार॥६
प्रयत्न सदैव करते रहो
प्रयास विफल नहीं जाता है
रस्सी के निरंतर घर्षण से
पत्थर तक घिस जाता है॥७
सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़
क़दम- क़दम तू बढ़ा
आगे ज़रा तू देख
तेरा लक्ष्य मुस्कुरा रहा॥८
स्वरचित मौलिक रचना
सुमन बिष्ट



