
गौरी नंदन आ गए, देने को वरदान।
बरसी संकट चौथ पर,उनकी कृपा महान।।
बने प्रदाता लाभ शुभ,छंद शास्त्र का ज्ञान।
अष्ट सिद्धियांँ प्राप्त हैं, रचते सकल विधान।।
अष्ट विनायक देव हो,लंबोदर है पास।
विघ्न हरण मंगल करण,करते पूरी आस।।
सुखद सलोनी छवि लगे हरते सभी कलेश।
माता जिनकी पार्वती, लगते पिता महेश।।
माताएंँ सब है रखी,आज दिवस उपवास।
पूरी होगी कामना,उर मे है विश्वास।।
चांँद देख पूजन करें,तिल गुड़ लड्डू साथ।
घूम-घूम कर अर्ध्य दें,कुंतल जल ले हाथ।।
शकरकंद सुथनी चढ़े,हलवा गाजर संग।
तिलकुट की ढेरी बना,उर में भरे उमंग।।
एक दंत गणराज को,मना रही मांँ आज।
चौक पूर रखती कलश,रोली चंदन साज।।
माँगन में मांँ मांँगती,गणपति से उपहार।
लाल रहे खुशहाल नित, जीवन भर संसार।।
हाथ जोड़ विनती करें,बारंबार प्रणाम।
अनधन से भण्डार भर,सुखमय रखना धाम।।
डॉ गीता पांडेय ‘अपराजिता’
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश




