साहित्य

मकर संक्रांति

मधु माहेश्वरी

लोहड़ी,मकरसंक्रांति और ओणम
फसलों के त्यौहार
तुम्हारे लिए

दिशा बदली सूर्यदेव ने
लगा बदलने मौसम
तुम्हारे लिए

कपिलमुनि आश्रम पहुंची गंगा
जाकर मिली समंदर
तुम्हारे लिए

नदियों में स्नान करके
होते क्षय पाप
तुम्हारे लिए

तिलगुड़,पादुका,वस्त्र,खिचड़ी
कंबल करें दान
तुम्हारे लिए

सूर्य देवता तुम्हें समर्पित
पावन संक्रांति पर्व
तुम्हारे लिए

वध किया शंकासुर दानव
संक्रांति देव ने
तुम्हारे लिए

चावल,दाल,मौसमी सब्जियां
मिला पकाई खिचड़ी
तुम्हारे लिए

आस्था,स्वास्थ्य,मूल्यों का
प्रतिमान बनी खिचड़ी
तुम्हारे लिए

तिलगुड़ ,गजक,रेवड़ी, लड्डू
संक्रांति के भोग
तुम्हारे लिए

आसमान में पतंग उड़ाकर
काया बने निरोगी
तुम्हारे लिए

हुआ समापन खरमास का
आई मंगल बेला
तुम्हारे लिए

शस्य-श्यामला हुई प्रकृति
घटने लगी शीत
तुम्हारे लिए
मधु माहेश्वरी ,गुवाहाटी असम

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