साहित्य

आराम है हराम

उदय किशोर साह

जागो वत्स खुद को  तुम पहचानों
अपनी युवा शक्ति को भी     जानों
तेज है तेरी शक्ति की   अनुपम धार
खुद से खुद पर करो  कर्म की प्रहार

मुसीबत से है ना कभी भी घबराना
उम्मीदों की दीपक सदैव ही जलाना
बुझा ना पायेगी तेज आँधी की बयार
एक दिन हो जायेगी मुसीबत की हार

कठिन नहीं है जग का कोई भी काम
मिहनत है   करना नित्य  सुबह शाम
बुला रही है तेरी मंजिल की      धाम
चलना है जीवन आराम है      हराम

वो देखो आसमां पे   हँसते हुए तारे
ठोकर जीवन की होंगें गर्दिश में सारे
अपनी जिद को करना है        प्रणाम
मिल जायेगी सफलतायें        तमाम

युवा शक्ति को मेरा है हजारों नमस्कार
ये करता है सपनों को एक दिन साकार
कठिन मिहनत है जिनका        व्यापार
हरा ना पायेगी इनको ये जग     संसार

उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार

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