
निज को आबाद करते हैं ,
जब तुमको याद करते हैं ।
बदनाम न करे कोई हमें ,
बस जमाने से ही डरते हैं ।।
सीने में लपट अग्नि की है ,
हम स्वयं से ही लड़ते हैं ।
गिला करता कोई तुम्हारी ,
मुॅंह पर थप्पड़ जड़ते हैं ।।
सब कहे हम तुमपे मरते ,
बेवफाई ही सब करते हैं ।
दूर रहे पहले से जो थे ,
सूखी सहानुभूति भरते हैं ।।
फिर भी सबसे चोरी चोरी ,
याद तुम्हें किया करते हैं ।
भयभीत होता दुनिया से ,
फिर भी तुम्हें ही वरते हैं ।।
माता जानकी
जनक जी के जिया बानी ,
माई धरती के धिया बानी ,
श्रीराम जेकर पिया बानी ,
हाॅं हाॅं हम त सिया बानी ।
जनकपुर के चिड़िया बानी ,
त्रेता के हम तिरिया बानी ,
बिहार के बेटी यूपी के बहू ,
श्रीरामजी के पिरिया बानी ।
ब्रह्मांड के हम शून्य बानी ,
पुनौरा के हम पुण्य बानी ,
बिहार के हम बानी हाड़ ,
शक्ति में हम परिपूर्ण बानी ।
श्रीराम हमर बानी बिष्णु ,
हम त उनकर रिया बानी ,
श्रीरामजी हमर बानी करम ,
हम त उनके किरिया बानी ।
जनकजी के जान जानकी ,
अयोध्या बहू अभिमान की ,
जय बिहार पुनौरा धाम की ,
मात लव कुश हनुमान की ।
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।




