साहित्य

पतंग

रिया राणावत

पतंग की डोर थामे,
उड़ाने भरी तूने ,
खुदको ऊंचाई पर पहुंचा के ,
सपने सच किए तूने ।।

पतंग , पतंग , पतंग ,
रंगबिरंगी पतंग।
बच्चों के मन को भाए,
बढ़े – बूढ़े सबको लुभाए।।

पतंग नई उम्मीद,
नया सवेरा,
नन्हीं आंखों में उड़ान भर लाए ,
पतंग हमे बहुत लुभाए।।

आस्मां में उड़ सपने भर लाए,
अपने सपनों की मंज़िल तक ले जाए ,
उड़ान इतनी ठोकरें खाए,
फिर भी अपने लक्ष्य तक पहुंच पाए।।

पतंग, पतंग, पतंग,
बहुत सुंदर सी पतंग ,
कभी आस्मां को धक बैठे सब पतंग,
पतंग जितना सिखाए ।।

मुश्किलों से लड़ना सिखाए,
ना रूकती है हमको ,
कोशिशों से ,
ना हारा हुआ जताती है हमे ।।

पतंग की डोर थामे,
उड़ाने भरी तूने ,
खुदको ऊंचाई पर पहुंचा के ,
सपने सच किए तूने ।।

–रिया राणावत
कालीदेवी,झाबुआ(मध्यप्रदेश)

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