साहित्य

अकेलापन

संगीता वर्मा

मेरे अकेलेपन से जो निकले मेरी कलम से अल्फाज वो,जैसे दिलों मे जगा दे आगाज़, हर शब्द में बसी है एक नई कहानी,तुम्हारे ख्यालों की है ये गहराई पुरानी मेरे अकेलपन की है ये निशानी।

 

अख़बार के पन्नों पर मेरी कविता चमकी जैसे आसमान में कोई नयी किरण दमकी, तुम्हारे जज़्बातों की मिठास अनमोल है मेरी हर पंक्ति में छिपी मेरे अकेलेपन के बोल है।

 

मेरे शब्दों में है सच्चाई की शक्ति,कवि हृदय की ये अद्भुत भक्ति।मेरी कलम से झरती है प्रेरणा की बूँद,इस दुनिया में घुलती है जैसे मधुर सुगंध।

 

मेरी कविता ने सब जगह ख्याति पाई,मेरे अकेलेपन मे गर्व की रोशनी छाई, जो हर भावना को अपने शब्दों मे कलम द्वारा उतार देती।

 

मेरे अकेलेपन का इस सफलता का है हमे मान,हमारी कविताएँ रहें सदा यूँ ही जवान मेरे शब्दों में है वो जलती आग मुझे खुद पर है विश्वास ।

 

मेरी कविता ने सबके दिलों में जगह बनाई यूँ ही बढ़ती रहे, नए आयामों की ओर,मेरे शब्द बनें दुनिया के हर दिल का शोर।

 

मेरे शब्दों में है वो जलती आग,हर पंक्ति में छिपा है अनमोल राग,लिखती रहूं यूँ ही दिल की सदा,मेरे शब्दों से चमकेगी हर दिशा।

 

स्वरचित रचना

संगीता वर्मा

कानपुर उत्तर प्रदेश

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