
हे महावीर, चिरंजीवी, पवनसुत
रामदूत हनुमान जी।
कर देना पूर्ण सबके काम जी।
श्रीमंत बुद्धि, विद्यावान
सिंदूर चढ़ाएं,पूजन करें
करते तुम्हें प्रणाम जी।
किष्किंधा में सुग्रीव जी के सब कारज तुमने सुलझाएं।
मिट गई उनकी व्यथा सारी
श्री राम जी से जब उन्हें मिलवाए।
जब ना सुलझे,
उलझे तुम्हारे धंधे।
याद उनको कर लेना
तुम सब उनके प्रिय
तुम्हारी सारी उलझनों को
पवनसुत सुलझाएंगे,
जो हम तुम ना कर सके
वह करके दिखाएंगे।
विश्वास उन पर कर लेना।
राम राम भज लेना
मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा



