
.ये न्यूज़ वाले भी यारो, बड़े निराले होते हैं,
छोटी-सी बात को लेकर, किस्से मतवाले होते हैं।
कहीं बिल्ली छत पर चढ़ जाए, “ब्रेकिंग” चल जाती है,
मोहल्ले की हर छोटी घटना, दुनिया बन जाती है।
सच को थोड़ा घुमा-फिराकर, ऐसे रंग चढ़ाते हैं,
सूखी रोटी की बातों में भी, पकवान दिखाते हैं।
एंकर साहब चिल्ला-चिल्ला, इतना शोर मचाते हैं,
लगता है जैसे वो खुद ही, सीमा पर लड़ आते हैं।
पहले खबर बनाते हैं, फिर उस पर बहस चलाते हैं,
चार मेहमान बुलवाकर, सबको खूब लड़ाते हैं।
मौसम बोले धूप निकलेगी, बारिश फिर हो जाती है,
इनकी हर भविष्यवाणी भी, अक्सर गोल हो जाती है।
टीआरपी की दौड़ में यारो, क्या-क्या खेल रचाते हैं,
मिर्च-मसाला खूब मिलाकर, दर्शक रोज़ फँसाते हैं।
फिर भी शाम ढले हम सब, टीवी आगे आते हैं,
इनकी मीठी-तीखी बातों पर, हँसते और मुस्काते हैं।
दुनिया चाहे जैसी हो पर, इनका अलग जमाना है,
खबरों से ज्यादा खबरों का, अंदाज़ ही सुहाना है।
कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश




