साहित्य

न्याय मूर्ति महारानी* *अहिल्याबाई होलकर

ममता श्रवण

न्याय की देवी रानी अहिल्या,

कलयुग में भी थी देवी स्वरूपा।

देने हेतु अपनी प्रजा को न्याय,

कर जाती थीं वो कार्य अनूपा।।

 

एक दिवस देने गाय को न्याय,

ऐसी दिखलाई थी न्यायधर्मिता।

सारा नगर रह गया अचंभित ,

देख महारानी की स्पष्टवादिता।।

 

एक दिवस मद में चूर कुंवर ने,

रौंद दिया था गौ सुत मार्ग में।

तब तड़पकर वो हुआ था मृत

व वेदना थी मां गाय के मन में।।

 

जब ज्ञात हुई यह बात रानी को,

तत्क्षण न्याय सुना दिया उनने।

उसे भी वैसे ही कुचला जाए,

बछड़े को जैसे कुचला है जिसने।।

 

और ज्ञात हुआ कि वो कुंवर है,

फिर भी न बदला उनका न्याय।

तब सम्मुख आ उस गाय ने ही,

विनती कर बदलवा दिया न्याय।।

 

ऐसी न्यायमूर्ति महारानी को,

है शत शत वंदन नमन हमारा।

जिन्होंने निज बल ,बुद्धि ,ज्ञान से,

होलकर राज परिवार संभाला।।

ममता श्रवण

अग्रवाल

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